–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल
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सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-28
आइल भोजपुरिया चिट्ठी
हमार पियवा हाफ पैंटे में घूमे

आजु पह फाटते काकी जंगली शिवजी का मंदिर में पूजा करे गइल रहली. राहिये में लभेरन के घर परत रहे, त लवटत खा उनुका दुआर प चलि गइली आ हाँक लगवली. लभेरन काकी के देखते गोड़ छुअले आ दलानि में बइठवले. अचानक उनुका ध्यान आइल कि ऊ हाफ पैंट में बाड़े त सरपटिये घर ओरि भगले.
काकी पलक झपकते बूझि गइली. लभेरन का अवते ऊ मुस्कुरात सवाल दगली – आजु-काल्हु त ढेरे लोग, हाफ पैंट में लउकत बा.
लभेरन कहले – ऊ त ठीक बा काकी, बाकिर जब केहू घर पर आवे त कवनो पारिवारिक आदमी के, खास करके घर का मुखिया के हाफ पैंट पहिरि के रहल शोभा नइखे नु देत! ईहे नु हमनी के संस्कार ह!
काकी टोकली – “लोग एकरा के आधुनिक पहिनावा कहऽता, पच्छिम में ईहे चलेला. लोग त ईहो कहऽता कि लोगन के ब्रॉड माइंडेड होखेके चाहीं, हर बात में पुरनका दिन के रट ना लगावे के चाहीं. अब तू बताव कि एह पर हमार सास्तर-पुरान का कहत बा.” लभेरन गंभीर हो गइले आ कहे शुरू कइले.
भारतीय संस्कृति अउर सनातन परंपरा में पहिनावा के लेके जवन दृष्टिकोण बा, ऊ मुख्य रूप से देश, काल आ पात्र पर आधारित बाटे. हिंदू शास्त्रन में ‘सभ्य’ ओकरा के कहल गइल बा, जे अवसर का मोताबिक वस्त्र धारण करे.
मनुस्मृति आ अन्य स्मृतियन में त स्पष्ट निर्देश बा कि एगो स्नातक (शिक्षित पुरुष) के बाहर जात खा शालीन वस्त्र धारण करेके चाहीं. बिना कवनो कारण के नंगा रहला भा बिना ऊपरी वस्त्र के सार्वजनिक स्थान पर उपस्थित रहला के ‘अशिष्ट’ आचरण मानल गइल बा.
शास्त्र में त स्पष्ट संकेत बा कि ठेहुना (घुटना) से ऊपर कपड़ा पहिनि के सभा में भा दोसरा का सोझा ना जाए के चाहीं. एकरा के ‘नग्नप्राय’ (लगभग नंगा) मानल गइल बा.
नैकवस्त्रो न नग्नः स्यान्न चाप्रयतो भुञ्जीत. (आपस्तम्ब धर्मसूत्र 2.31)
मनुस्मृति में त स्पष्ट कहल गइल बा कि बुद्धिमान व्यक्ति के कबहुँओ अशुद्ध अवस्था में भा ‘अनग्न’ (अपूर्ण/नग्नता के समान वस्त्र) वेशभूषा में दोसरा का घरे ना जाएके चाहीं.
“न चोच्छिष्टो न चानग्नः परगेहं विशेत् बुधः.”
नीति ग्रंथन में त वेशभूषा के व्यक्ति का चरित्र के दर्पण मानल गइल बा. जो केहूँ अपना के ‘उच्च श्रेणी’ के मानत बा त ओकरा पहनावा में ‘गंभीरता’ लउके के चाहीं.
आजु-काल्हु ‘हाफ पैंट’ पहिनिके सार्वजनिक स्थान भा दोसरा का घर जाएवाली प्रवृत्ति आधुनिकता के प्रतीक मानल जात बिया, बाकिर शास्त्रीय आ सांस्कृतिक दृष्टि से एकरा के अत्यंत ‘अशिष्ट’ अउर ‘मर्यादाहीन’ आचरण मानल गइल बा.
काकी बीचे में टोकली – विदेशी लोग का पहिनेले, जेकरा देखादेखी हमनी किहाँ गोहियो पाड़ा के बात करे लागेले? लभेरन बतवले कि ओहिजो अइसन बात नइखे.
पच्छिम में त ‘शिष्टाचार’ के बहुत कड़ा नियम बाड़े सन. ओहिजा त ड्रेस कोड चलेला. ओहिजा के उच्च शिक्षण संस्थान, कॉर्पोरेट ऑफिस, चर्च, भा कवनो औपचारिक रात्रिभोज में हाफ पैंट पहिनि के गइल आजुओ ‘अशिष्टता’ आ ‘गँवारूपन’ मानल जाला. ओहिजा हाफ पैंट के ‘कैजुअल’ भा ‘बीच वियर’ (समुद्र तट के कपड़ा) मानल जाला. ओहिजो जे केहूँ का घरे औपचारिक मुलाकात खातिर हाफ पैंट में जाई, त ओकरा के ‘कम सामाजिक समझ’ वाला आदमी मानल जाई. ओहिजा वास्तव में ‘एलीट’ भा सुशिक्षित वर्ग के लोग अपना वेशभूषा के लेके बहुत सचेत रहेलन. साँच पूछीं त ओहिजो अर्धनग्नता भा अंग-प्रदर्शन मुख्य रूप से ‘पॉप कल्चर’, ‘पार्टी कल्चर’ भा ओही लोगन तक सीमित बा, जे अपना परंपरा के ना मानेलन. हमनी का जवना के ‘आधुनिकता’ समुझि के अपनावत बानी जा, ऊ ओहिजा का ‘अनुशासनहीनता’ के हिस्सा हटे.
सार्वजनिक स्थान पर भा केहूँ का घरे हाफ पैंट में गइला के मतलब साफ बा कि ऊ आदमी ओह व्यक्ति भा स्थान का प्रति गंभीर नइखे. ई एक प्रकार के अहंकार हटे, जहँवा व्यक्ति अपना सुविधा के सामाजिक मर्यादा से ऊपर राखिके चलेला. आजु-काल्हु जेकरा के ‘कंफर्ट’ कहल जाता, ऊ वास्तव में ‘सांस्कृतिक विस्मृति’ हटे. साँच त ई बा कि चाहे मरद होखे भा मेहरारू, शरीर का अंगन के अनावश्यक प्रदर्शन सामने वाला का मन में ‘सम्मान’ का बजाए ‘असहजता’ पैदा करेला. ई बेवहार भारतीय ‘सभ्यता’ ना, बलुक पश्चिमी देशन का ‘बीच कल्चर’ के गलत अनुकरण हटे, एकरा के ‘उच्च श्रेणी’ के लेबल दिहल बहुत गलत होई.
काकी चिंता का सुर में पुछली – तब आजु का पीढ़ी के का करेके चाहीं ?”
लभेरन कहले – आजु का पीढ़ी के ‘आधुनिकता’ आ ‘उच्छृंखलता’ के बीच के अंतर समुझे के परी. अवसर का अनुकूल वेशभूषा होखे के चाहीं. खेल का मैदान में हाफ पैंट ठीक बा, बाकिर ड्राइंग रूम में, मंदिर में भा केहूँ के घर जात खा पूरा कपड़ा पहिनला में आपन गंभीरता त बड़ले बा, सामने वाला का प्रति सम्मानो बाटे.
काकी मुस्करात टुभुकली – तोहरा का लागऽता, लोगन पर तोहरा एह बात के कवनो असर होई? हमरा त लागऽता कि एहू प कवनो गाना निकलि जाई –
सभका बलम के पजामा आ धोती
हमार पियवा हाफ पैंटे में घूमे.
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भोजपुरिया चिट्ठी, हाफ पैंट, सामाजिक शिष्टाचार, डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल,

संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28</e
पो. – मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030 मो. 9831649817
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