मोदी के बॉस नीतीन नबीन

मोदी के बॉस नीतीन नबीन

-टीम अँजोरिया

#भाजपा #नीतीन-नबीन #मोदी #जेन-जी

भारत के राजनीतिक इतिहास में आजु एगो अनूठा बाति हो गइल जब देशे ना दुनिया के सबले बड़हन राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर एगो नौजवान नेता नीतीन नबीन के चुनाव हो गइल. वइसे एकरा के चुनाव कम चयन बेसी माने के चाहीं काहेंकि एहमें कवनो मतदान ना भइल. भाजपा आ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के चयन प्रक्रिया का हिसाब से नीतीन नबीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दीहल गइल. एहसे पहिले उनुका के पिछला महीना भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत कइल गइल. भाजपा के विधान का हिसाब से जब ओकर आधा से बेसी प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष चुन लीहल गइलें ओकरा बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के प्रक्रिया के शुरुआत भइल. एकरा ला एकही आदमी के मनोनयन पत्र मिलल नीतीन नबीन के. केहू दोसर आदमी एह पद के दावेदार ना बनलन आ एह चलते नीतीन नबीन के सर्वसम्मति से अध्यक्ष बना दीहल गइल.

आजु उनुका सम्मान में आयोजित समारोह में भारत के प्रधानमंत्री, पहिलका हिन्दू प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी अपना संबोधन में कहलन कि अब से नीतीन नबीन उनुकर आ सगरी भाजपा के बॉस हो गइलन आ मोदी भाजपा के कार्यकर्ता. मोदी के बॉस हाथ जोड़ दीहलन एह सम्मान पर.

अब अतना समाचार त सभका मालूम हो गइल त एह लेख के मकसद का बा? मकसद ई बतवला के बा कि देश के राजनीति बिना कवनो हल्ला-गुल्ला-बवाल के जेन-जी का हाथे सँउप दीहल गइल. जेन-जी के उकसावे के कोशिश करेवालन का आशा पर पानौ पड़ गइल. बाकिर एगो गलत जानकारी पसर गइल बा कि नीतीन नबीन भारत के कवनो राजनीतिक दल के सबले कम उमरिया राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गइलन.ई दावा गलत बा काहें कि देश के बँटवारा करावे वाला जवाहर लाल नेहरू अपना कार्येकाल में साल 1959 में अपना बेटी इन्दिरा गाँधी के कांग्रेस के अध्यक्ष बना दीहले रहलन. तब इन्दिरा गांधी के उमिर महज 41 बरीस के रहुवे. बाद में राहुल गाँधी जब कांग्रेस के अध्यक्ष बनलन तब उनुकर उमिर 47 बरीस के रहुवे. नीतीन नबीन के उमिर 45 बरीस के बा. नीतीन नबीन राहुल से कम उमिर में राष्ट्रीय अध्यक्ष जरुर बन गइलन बाकिर इनका के पहिला जगह ना दीहल जा सके काहे कि ओह जगहा पर इन्दिरा गाँधी के नाम बा. अलग बाति बा कि इन्दिरा गाँधी के उनुकर पिता – बाप लिखब त ढेर लोग के अनकसाव हो जाई – जवाहर लाल अध्यक्ष बनवले रहलन जबकि नीतीन नबीन एगो सर्वसम्मत चयन प्रक्रिया से चुनाइल बाड़न.

दुनिया के पहिलका गणतंत्रन में बिहार के वैशाली गणतंत्र के नाम लीहल जाला जवना के स्थापना ईसा से छह सौ बरीस पहिले लिच्छवी राजवंश का तरफ से भइल रहुवे. भारत में लोकतांत्रिक तरीका से चयन के एगो परंपरा रहल बा. चाहे ऊ कवनो गणतंत्र के देखल जाव, कवनो शंकराचार्य पीठ के देखल जाव, भा राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संघचालक के पद ला देखल जाव. बहुत गहन तरीका से अगिला पदाधिकारी के चयन कइल जाला आ एहमें ओकर वंशावली ना देखल जाव ओकर प्रतिभा देखल जाला.

भारत के मौजूदा राजनीतिक दलन में से कुछ बँवारा दलन के बाति छोड़ दीहल जाव त अधिकतर में राजशाही चलेला. नेहरू के बेटी, इंदिरा के बेटा, राजीव के बेटा, शेख अब्दुल्ला के बेटा, चौटाला के बेटा, बादल के बेटा, मुलायम के बेटा, मायावती के भतीजा, ममता के भतीजा, बीजू पटनायक के बेटा, शरद पवार के बेटी-भतीजा, ठाकरे के बेटा, रेड्डी के बेटा, केसीआर के बेटा, करुणानिधि के बेटा, स्टालिन के बेटा, शिबू सोरेन के बेटा, लालू के बेटा वगैरह के उदाहरण दीहल जा सकेला. हालांकि एहमें से बहुते लोग के राजनीतिक क्षमता आ हैसियत के कम ना आंकल जा सके. हँ पप्पू-टप्पू-तेजू वगैरह का चलते ई वंशवाद अधिका बदनाम हो गइल.

अब देखे के बाति ई बा कि नीतीन नबीन कतना मजबूती से भाजपा पर आपन छाप छोड़े में कामयाब होखत बाड़न. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, नीतीन गडकरी वगैरह के एगो बड़हन परंपरा भाजपा में रहल बा. अलग बाति बा कि सबले बेसी कार्यकाल पावे वाला जेपी नड्ढा के उपलब्धि अलगे तरह के रहल बा. लोकसभा चुनाव में कह दीहलन कि भाजपा के अब संघ के जरुरत नइखे रहि गइल आ मोदी के हार होखत होखत बाँच गइल. नबीन अब कवन आ कइसन उदाहरण राखत बाड़न ई देखे ला सभे ला तिकवले बा.

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