दुर्गा माई के नौ रुप 2.ब्रह्मचारिणी

(नवरात्र के दुसरका दिन, अतवार, ६ अक्टूबर २०१३)

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू |
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा |
माई दुर्गा अपना दूसर रूप में ” ब्रह्मचारिणी ” का नाम से जानल जाली.नवरात्र में दोसरका दिन माई के एही रूप के पूजा होला.ब्रह्मचारिणी माने तप के आचरण करेवाली.माई के ई रूप पूरा ज्योतिर्मय आ अत्यंत भव्य बा.इहाँके दहिना हाथ में जप के माला आ बाएँ हाथ में कमंडल रहेला.पर्वतराज हिमालय का बेटी के रूप में पैदा भइला का बाद भगवान शिवजी के अपना पति का रूप में पावे खातिर कारन इहाँ के बहुत तपस्या करेके परल रहे.कई हजार बर्ष के कठिन तपस्या से प्रसन्न होके भगवान शंकर इहाँ के वर दिहलीं कि तोहार मनोकामना जरूर पूरा होई.माई के ई रूप भक्तन के अनंत फल देबेवाला हऽ.माई के एह ब्रह्मचारिणी रूप के उपासना से मनुष्य में तप,त्याग,वैराग्य,सदाचार आ संयम के बढ़ोत्तरी होला. नवदुर्गा में दोसरकी माई ब्रह्मचारिणी दुर्गाजी के जय हो.


(चित्र आ विवरण डा॰रामरक्षा मिश्र का सौजन्य से)
पहिले प्रकाशित हो चुकल बा. तिसरकी बेर प्रकाशित

0 Comments

Recent Posts



अंजोरिया पर खोजीं -

आपन टिप्पणी, लेख, कहानी, कविता, विचार भेजे खातिर -

anjoria@rediffmail.com

अगर राउर रचना पहिला बेर आ रहल बा त आपन एगो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ में जरूर डाल दीं.

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..