नेता के जबान आ आपन देश

– जयंती पांडेय

आजु काल्हु , जान जा ए रामचेला कि नेता लोगन के जबान बिछला जा तिया. कहले बा कि चाम के जीभ ह, बिछला जाले. लेकिन नेता लोगन के जीभ सबसे जियादा बिछलाले. खास क के जब चुनाव के पहिले वाला मौका होखो. अब देखऽ ना कि दू दिन पहिलही मोदी जी, चाहे करुणानिधि जी का बोलले अब का लीपापोती करऽता लोग. बिछलाला त गोड़ो लेकिन ऊ जब बिछलाला त लोग गिर परेला आ ओकरा बाद आंखि झुका के धूरा झारे ला आ एने ओने तिकवे ला कि केहु देखत त नइखे. लेकिन नेता के जब जबान बिछलाले त ऊ आंखि उठा के बहस करेला. जान जा कि जिनगी तीन गो चीज बिछलाला, एगो जीभ, दोसरके गोड़ आ तीसरके नजर. गोड़ बिछलाइल त बूझि जा कि आदमी लापरवाह रहे, जबान बिछलाइल त माने कि ओह पर भरोसा करे लायक नइखे आ जे आंखि बिछला गइल त जान जा कि आदमी बदचलन बा. ई देश के राजनीति के त कवनो चरित्र बा ना एहिसे जब नेता के जुबान बिछलाले त केहु के हरानी ना होला. काहे कि नेता के जबान बिछलाले ना, ओकरा के ढकेल के बिछलावल जाला आ ढकेले वाला खुद उहे होला जेकर जबान होले. ई काम जहां वोट बैंक होला ओहिजा बेसी होला. अइसन बूझाला कि वोट बैंक के चौकठ पर केला के छिलका गिरल रहेला. ई जान जा कि जे केला के छिलका ना गिरल होखो त नेताजी अपना पाकिट में से निकाल के ओहिजा गिरा देले. अपना देश में केला के बड़ा महत्व बा केला के पतई, चाहे ओकर धड़, चाहे केला के घवद सबके अलग-अलग महत्व बा. एहिसे अपना देश में नेता लोग केला पाकिट में ले के घूमे ला. फल खा लिहले आ छिलका गिरा दिहले अगर कम्पीटीटर बा त ओकर गोड़ बिछलाई आ बोटर बा त ओकरा खातिर नेताजी जबान बिछलाई.

अब ई जान जा कि चुनाव नारा काल होला, प्रश्न काल होला, असमंजस काल होला, चुनाव फिसलन काल होला. कवनो नेता के जिनगी में चुनाव हरला से बड़हन डर कवनो ना होला. अब ई मत सोच लीहऽ कि जबान जे नता होई ओकर चमड़ो ओही के होई. नाहीं, जबान त ओकरे बा लेकिन ऊ जबान के चमड़ा ओकर ना होला. ई केहु के मार के लिहल जाला. इहे कारण ह कि आजादी के बाद एतना लोग मुआ के ई चमड़ा हासिल कइले बा लोग. उहे चमड़ा के कारण पूरा देश ऊ लोग केला के छिलका पर रखले बा. जब चाहे धकिया के पूरा सिस्टम के गिरा देवे.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

0 Comments

Recent Posts



अंजोरिया पर खोजीं -

आपन टिप्पणी, लेख, कहानी, कविता, विचार भेजे खातिर -

anjoria@rediffmail.com

अगर राउर रचना पहिला बेर आ रहल बा त आपन एगो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ में जरूर डाल दीं.

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..