लँगड़ा आम पुआ झुर झुर …

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

#भोजपुरिया चिट्ठी #गँवई-झगड़ा #डॉ-रामरक्षा-मिश्र-विमल

सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-34

आइल भोजपुरिया चिट्ठी

लँगड़ा आम पुआ झुर झुर …

village-street-verbal-fights

सुबहे से पड़ोस में जवन झगड़ा शुरू भइल रहे, ऊ अभी एगारह बजि गइल आ बिना खइले पिअले शुरू बा। काकी बड़बड़ात रहली- नकिया देले बाड़े सन। आदमी के खाइल-पिअल मुश्किल भइल बा।
अतने में लभेरन पहुँचले। काकी के तमतमाइल चेहरा देखिके चिंता प्रकट कइले- का भइल काकी ? अतना परेशान काहें लागतानी?
काकी पड़ोसी ओर इशारा कइके बोलली- देखत नइखऽ, सुबह साते बजे से शुरू बा, अब एगारह पार क गइल। हइसे झगड़ा होला? घर के मेहरारू लड़तारी सन आ मरद टुकुर-टुकुर ताकतारे सन। अउर त अउर मेहरमउगा बीच-बीच में अपना-अपना मेहरारू के पानिओ पियावतारे सन।
“माने ई त हो गइल पानी पी पी के कोसल।”- लभेरन चुटकी लिहले।
काकी खिसिया गइली- “एहिजा हमनी के कुफुते जान जाता आ तहरा मजाक सूझता? तहरा टोला में गेङ-झगरा देखे में बड़ा मजा आवेला का?”
लभेरन हँसे लगले- सही कहतानी काकी, खिसिआइबि जनि, हमरा टोला में दू गो अइसन नामचीन गेङाहिन बाड़ी सन कि उहनी के गेङा सुनिके रउआँ हँसत-हँसत लोटपोट हो जाइबि आ हटे के नाँव ना लेबि।
काकी के उत्सुकता बढ़लि। ऊ उठि के बइठि गइली। अइसनो होला का! तनी बताव त कइसे-कइसे झगरेली सन ऊ।
लभेरन बतावे शुरू कइले। “एक बेरि हम घर का काम से सेमरी जात रहीं। साहु जी का दोकानि पर पहुँचे से पहिलहीं लोगनि के भीड़ि देखिके थथमि गइलीं। तनी आगे बढ़लीं त बरियार झगड़ा चालू रहे। नाँव ना लेबि, ना त टोला में जीयल मुश्किल हो जाई। एने से फलाना बो आ ओने से फलाना बो, दूनों का पाछा-पाछा उनुकर बेटी आ देवरानी। दूनों का बीचे तीन गो मकान के दूरी रहे, बाकी बिना माइके के झगड़ा सिनेमा के मजा देत रहे। दूनों ओर से अच्छा-खासा मरद-मेहरारू आपन-आपन काम-धान्हा छोड़िके आनंद लेत रहन। हमरो मन हिले के ना करत रहे बाकिर बहुत जरूरी काम रहे, एहसे निकलि गइलीं।
तीन घंटा बाद जब लवटलीं त झगरा चालुए रहे। दूनों ओरि के सेनापति थाकि गइल रहन बाकिर केहूँ हार माने प तेआर ना रहे। एही में पुरुब ओरि से हाथ चमका-चमका के गाना शुरू भइल- लँगड़ा आम पुआ झुर-झुर…। एही सुर में मिलाके घर के अउर पुरनिया के नाँव धइ-धइ कविता के नया-नया पाँति बने लागल- भदई आम पुआ झुर-झुर…। ऊ जइसहीं सुस्तइली कि पछिया बयार बहे शुरू हो गइल। फलाना बो काहेंके चुप रहेवाली। ऊ शुरू भइली- बोकवा आम पुआ धप-धप…सुकवा आम पुआ धप धप। एनियो परिवार का लोगन के नाँव खँघराए लागल।
पछिया बहिन तनी मधिमइली कि पुरुआ बहिनि ताव में आ गइली- पाका काका, भाका काका…फेरु नया लाइन जोड़ाइल- बकुला काका…झक-झक झाका। माने झगड़ा रिदम में रहे। भले उहन लोग के ताल के कवनो जानकारी जनि होखो बाकिर झगड़ा बेताल ना रहे आ दर्शक ओह संगीत पर मस्त रहन, भीड़ हटे के नाँव ना लेइ।
काकी एगो टोन मरली- माने तहरो टोला एगो लोके बा, ना?
काकी फेरु कहली- तू ठीके कहलऽ हा, गाँव-घर का झगड़ा में एगो खास तरह के नाटकीय रस होला। एही से त दू आदमी झगड़त रहेला आ पूरा पंचायत दर्शक बनल रहेले। मुद्दा कवनो ना होखे आ होखबो करेला त छोटहन गो। “हमार भइंसि तोहरा खेत में काहें गइलि?” से बहस शुरू होके इतिहास तक पहुँच जाले।
लभेरन जोरले- अतने ना काकी, एहमें बीच-बचाव करेवाला लोग अक्सरहाँ जज बनि जालन। ऊ लोग आगि में घीव डालत रही आ मजा लेत रही।
काकी चिंता प्रकट कइली- आखिर झगड़ा होला काहें?
लभेरन कहले- एकर कई गो कारन बा। पहिल त दबल खीसि। छोट-छोट बात पर जवन मन के भँड़ास जमा होत रहेले, ऊहे एक दिन विस्फोट बन जाले। अहम के भी एहमें बड़हन योगदान बा। हमहीं काहें नवबि, ई अहम झगड़ा के लंबा खींचेला। अधिकतर त देखल गइल बा कि गलतफहमी का कारन कलह शुरू हो जाला। बात होई कुछ आ बूझि जाई लोग कुछ। तुलना वाली बेमारी भी कम ना होले। फलनवा भीरी अतना काहें बा, ई इरिखो जिए ना देले।
काकी कहली- एहमें कवनो फएदा बा का? जब सभ लोग एह बात के जनबे करेला त झगरेला काहें?
लभेरन मुसकइले- झगड़ा कइला से भीतर दबल क्रोध फूटिके बहि जाला, मन हलुक हो जाला।
काकी बोलली- मजाक जनि करऽ, ई बताव कि लोग झगड़ा-झंझट मति करसु, एह खातिर का एहतियात बरते के चाहीं?
लभेरन बोलले- मए झगड़ा थोरहीं नीमन होला! कहीं जो झगड़ा अपमान, हिंसा भा बदला के भावना में बदल गइल तब का होई? झगड़ा से बाँचे खातिर खुद सावधान रहे के चाहीं आ बालो-बाचा के समुझावे के चाहीं। सबसे पहिल जरूरी बात बा कि सुने के आदत डाल लीं। ढेर झगड़ा त एही कारन होला कि लोग खाली बोलल चाहेलन, सूनल केहू ना चाहे। कवनो बात के जबाब तुरत्ते ना देबे के चाहीं, सोचि-समझि के कुछ बोले के चाहीं। छोट-छोट बातन के इग्नोर करे के चाहीं, मए बात के जबाब ना दिहल जाला, कवनो आइएएस के परीक्षा थोरे होता!
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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28</e
पो. – मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030

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