– टीम अंजोरिया
#शेयर बाजार #बैंकनिफ्टी #भोजपुरी-में-शेयर-चरचा
तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे
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जब एह लेख के लिखे बइठनी त माथा अझुरा गइल। समुझ ना पावत रहीं भा कहीं त तय ना कर पावत रहीं कि एह लेख के मथैला का बनाईं। काहे हमरा त ऊ जमाना इयाद आवत रहुवे – आया है मुझे फिर याद वो जालिम, गुजरा जमाना बचपन का… – बाकिर फेर सोचे लागीं कि भुलाइल कब रहनी की ईयाद आ गइल। तब सोचनी कि काहें ना एकर मथैला – तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे – बना दीं। बाकिर आदमी कतना आसानी से उनुका के भुला जाला जिनका से भेंट भइला का बाद इहे भरम बन जाला कि इनका के अतना आसानी से भुला ना पाएब बाकिर उनुका त मालूमे रहेला कि तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे। काहे कि रउरा जानत होखीं भा ना उनुका निकहा मालूम रहेला कि ऊ हर बेर लवटि के अइहें। एकरा बावजूद लोग भुलाइए जाला।
लेख के पहिला अनुच्छेद, परिच्छेद, भा गद्यांश – जवन मन करे मान लीं – पूरा भइला का बादो रउरा शायद तय ना कर पवले होखब कि हम कहे का जा रहल बानी। एहसे आगे बढ़ला से पहिले बतावत चलीं कि हम शेयर बाजार के चरचा करे जा रहल बानी। शेयर बाजार हर बेर आदमी के इयाद करावत रहेला – कुछऊ हो सकेला – बाकिर हमनिए का इ़याद ना राखीं। पता ना के बाकिर एगो विद्वान लिख गइल बाड़न कि लड़की अपना पहला प्यार और लड़का अपना आखिरी प्यार हमेशा याद रखता है। बाजारो के इहे हाल बा। बाजार अपना अतिथियन के हमेशा प्यार करेला आ समय समय पर सीख देत रहेला बाकिर वणिक -ट्रेडर- अतिथि तुरते भुला जालें। उनुका अतीत के यादे ना रह पावे।
कतना वणिक भा निवेशक लोग के इयाद बा साल 2000, भा 2008, भा 2020 ? आ जब इहो इयाद ना रहल त साल 2026 कहिया ले ईयाद रह पाई? शेयर बाजार में आइल गिरावट के ई एगो बड़का दौर जरुर बा बाकिर एकरा के सबले बड़का ना कहल जा सके। काहे कि अंक का आधार पर भलहीं अधिका लागो प्रतिशत का आधार पर अबहीं बहुते कुछ बाकी बा। गिरावट चलते रही आ कि बहुत भइल अब गँवे-गँवे उठल शुरु होखी! के जानत बा? कम से कम हम त बिलकुले नइखीं जानत। जानत रहतीं त ई लेख लिखे ना बइठल रहतीं, अगिला दिन के बाजार के तइयारी में रहतीं। चलीं अब एक एक करके एह बरीसन के ईयाद कर लिहल जाव।
बाजार में उतार चढ़ाव त हमेशा बनल रहेला। बाजार सोझ रेखा में कबहूं ना चले। हमेशा कवनो मदमस्त हाथी का तरह झूमत -डोलत चलल करेला। आ अइसनो ना कि एह बरीसन का पहिले कवनो दोसर मंदी ना आइल रहुवे। आइले होखी बाकिर तब अतना लोग शेयर बाजार में डुबकी लगा के नहाए भा डूबे ना आवत रहुवे। अब त घटवार चेतावत रहेला कि सम्हल के आगे डूबाह पानी, भँवर, चकोह भेंटा सकेला। बाकिर लोग त अपने धुन मेंं मस्त रहेला। इहे सोचेला कि दोसर केहू भलहीं डूबत होखे ऊ ना डुबिहे ! आ एह ले बड़हन गलती दोसर ना होखे। कहे वाला त इहो कहेलें कि नदी में पँवड़ाके डूबेला, जेकरा पँवड़े ना आवे से त किनारहीं से नहा के निकल जाला।
हँ त पिछला पचीस बरीस के इतिहास पर नजर डालल जाव त बाजार में बरीस 2000, बरीस 2008, आ बरीस 2020 का बाद सबले बड़हन गिरावट अबहीं चलिए रहल बा। पता ना अबहीं कतना गिरी? काहें कि चाचा ट्रम्प के हालत – हम छोड़ीं त छोड़ीं कमरिया छोड़े तब नू – वाला हो गइल बा। अब ई कहानी रउरा नइखे मालूम त पता लगाईं। हम सुनावे चलब त लेख अउरे लमहर हो जाई आ इंटरनेट पर आवे वाला केहू का लगे समय ना होला। बरीस 2003 में भोजपुरी में शुरू भइल दुनिया के ई पहिलका वेबसाइट अंजोरिया डॉटकॉम के चलावत अतना जानकारी त होइए गइल बा। त चाचा ट्रम्प त एह दहात कम्बल के छोड़े चाहत बाड़न बाकिर ई त कम्बल ना होके भालू ह, जे उनुके के दबोच लिहले बा। खैर।
बरीस 2000 में आइल गिरावट
त बरीस 2000 में आइल गिरावट के बहुते लोग डॉटकॉम के बुलबुला फूटला से जोड़े ला. बरीस 2000 के एह गिरावट का बारे मेंं गूगल बाबा के कहना बा कि –
(1995-2000) इंटरनेट कंपनियों में अत्यधिक निवेश के कारण तकनीकी शेयरों की कीमतों में आया एक सट्टा उछाल था। इंटरनेट के विकास को लेकर निवेशकों के “अतार्किक उत्साह” (irrational exuberance) ने मूल्यांकन को अत्यधिक बढ़ा दिया। मार्च 2000 में जब यह बुलबुला फूटा, तो नैस्डैक (Nasdaq) सूचकांक लगभग 77% गिर गया और कई इंटरनेट स्टार्टअप दिवालिया हो गए।
तब शायद बाजार सोचले होखी कि तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे । बाकिर केकरा ईयाद रहल ! बीच बीच में हम रउरा के कुछ गीत गवनइओ में बझावत रहब खजुराहो के मंदिरन लेखा। मंदिर के भीतर ले जे चहुँपी उहे असल भक्त होखी। बाकी लोग त बाहरे उकेरल मूर्तियन के निहारे टोहे में लागल रहि जइहें।
2008 की बाजार गिरावट
एकरा बाद आइल बरीस में लेहमन ब्रदर्स से जुड़ल गिरावट। हमार आंकड़ा आ आकलन हो सकेला कि गलत हो जाव से फेरू गूगले बाबा के कहलका पढ़ ली –
2008 की बाजार गिरावट
एक वैश्विक वित्तीय संकट था, जो मुख्य रूप से अमेरिका में सबप्राइम मॉर्गेज संकट और लेहमन ब्रदर्स के ढहने के कारण हुआ। इसने भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे सेंसेक्स में लगभग 52% से अधिक की गिरावट आई। यह मंदी रियल एस्टेट बुलबुले के फटने, तरलता की कमी और एफआईआई (FII) द्वारा भारी बिकवाली का परिणाम थी।
कोरोना के दौर 2020
बाकिर लोग फेरु एकरो के भुला दीहल। त आइल 2020 के कोराना मंदी। एकरा बारे में गूगल बाबा बतवलन कि –
2020 का कोरोना दौर वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए एक अभूतपूर्व गिरावट का समय था। लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियाँ रुकने से कार्बन उत्सर्जन में रिकॉर्ड गिरावट देखी गई। वहीं, दुनिया भर में स्वास्थ्य आपातकाल, व्यापार ठप होने और सड़कों पर सन्नाटा छाने से भारी आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ पैदा हो गईं।
बीस बरीस का भितरे आइल ई तीन गो बड़का गिरावट त सभका इयाद राखे के चाहत रहुवे बाकिर लोग सोचल कि अरे ना, अतना जल्दी कोरोना जइसन दौर बाजार ला त नाहिये आई! आ बाजार के खासियते इहे होला कि जब रउरा सबले बेसी गफलत में रहब तबहिंए उ रउरा के लतियावे आ जाई। आ रउरा गावे लागब –
आया है मुझे फिर याद वो जालिम
ईरान-अमेरिका युद्ध 2026
आ जबले 2026 वाला ईरान-अमेरिका युद्ध के ई दौर चल रहल बा तबले बाजार का ओर झाँके का बदला एही आ अइसने गीतन में रमल रहीं।
बाकिर हमहूं जानत बानी कि रउरा अइसन ना करब। काहे कि रउरा मालूम बा कि लोहरा के एह दौर का बाद आवहीं वाला बा सोनरा के ठुकुर ठुकुर वाला दौर । हमहूं मनाएब कि ई डरावना हकीकत जल्दिए सपना बन जाव आ तब हमनी का फेरू इन्तजार करब कवनो नवका गिरावट के। भुला जाएब कि बाजार में कुछऊ हो सकेला।


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