शायद पालिटिक्स अब कुछ बदल गइल बा (बतकुच्चन 168)
बात कहिले खर्रा, गोली लागे चाहे छर्रा. कहे सुने ला त ई ठीक लागी बाकिर बेवहार मे आदमी सोच समुझ के बोलेला. साँच बोलल जरूरी होखेला बाकिर जहाँ ले हो सके अप्रिय भा कड़वा साँच से बचे के चाहीं. एगो अउर मुहावरा आएदिन इस्तेमाल होखेला आ उ...
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