बतकुच्चन – ११
पिछला हफ्ता गोबर पथार के बात निकलल रहे त अबकी खर पतवार दिमाग में आ गइल बा. खर पतवार का बारे में सोचते दिमाग में खरखर होखे लागल जइसे कि मूंजियानी से गुजरत घरी आवाज निकलेला. अइसने खरखर से संस्कृत के एगो शब्द बनल रहे खर्पर. खर्पर...
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