Category: भाषा

बतकुच्चन – १५

पुरनका जमाना में रनिवासन में रानी लोग के खटवास-पटवास धरे खातिर एगो अलगे कक्ष भा भवन रहत रहे जवना के कोप भवन कहाव आ जहाँ रुसल आ रिसियाइल रानी लोग जा के खटवास धर लेत रहे. खबर मिलते राजा धावत चहुँप जासु अपना रानी के मनावे खातिर....

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बतकुच्चन – १४

जमाना औचक चहुँप के भौचक करे के चल रहल बा त सोचनी आजु एही चक पर कुछ बकचक कइल जाव. चक कहल जाला जमीन के कवनो बड़का खण्ड के आ एही से जमीन के छोट छोट टुकड़ा मिला के चक बनावल जाला त ओकरा के चकबन्दी कहल जाला. अब चकबन्दी के शाब्दिक अर्थ त...

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बतकुच्चन – १३

पहुँचा कहल जाला हाथ का हथेली के जोड़ वाली जगह, कलाई के भा मणिबन्ध के. आ पहूँची कहल जाला एगो खास तरह के गहना के जवन कलाई पर पहिरल जाला. भोजपुरी में एगो कहाउत ह पँहुचा पकड़त गरदन पकड़ लिहल. कुछ लोग पहिले त राउर सहारा लेबे खातिर राउर...

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बतकुच्चन – १२

तेरह तारीख के चुनाव परिणाम सुनत एगो बाति दिमाग में घूमे लागल. बंगाल में दीदी जीत गइली, तमिलनाडु में अम्मा. राजनीति में सत्ता के गलियारन तक पहुँचे वाला लोग में कबो कवनो भउजी आइल होखसु से याद नइखे आवत. पिछला हफ्ता बात त पहुँचा,...

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बतकुच्चन – ११

पिछला हफ्ता गोबर पथार के बात निकलल रहे त अबकी खर पतवार दिमाग में आ गइल बा. खर पतवार का बारे में सोचते दिमाग में खरखर होखे लागल जइसे कि मूंजियानी से गुजरत घरी आवाज निकलेला. अइसने खरखर से संस्कृत के एगो शब्द बनल रहे खर्पर. खर्पर...

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