श्रेणी: भाषा

नुक्ता का हेर फेर से खुदा जुदा हो सकेलें (बतकुच्चन – ‍१२०)

उर्दू के जानकार जानेलें कि कइसे नुक्ता का हेर फेर से खुदा जुदा हो सकेलें. उर्दू के एगो खासियत ह कि बहुते मात्रा लिखल ना जाव बूझ लिहल जाला. जे जानकार होला से त बड़ा आराम से पढ़ ली बाकिर नवसिखिया आदमी भुलाए गड़बड़ाए लगीहें. एक जमाना...

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भईया बूझलन पियाज भउजाई बूझली अदरख (बतकुच्चन ११९)

भईया बूझलन पियाज भउजाई बूझली अदरख. ना, ना. ई बतवला के कवनो जरूरत नइखे कि ई कहाउत सही ना ह. असल कहाउत दोसर ह, मियाँ बूझलें पियाज, मिंयाइन बूझली अदरख. हमहूं जानत बानी कि असल कहाउत का ह बाकिर पिछला दस दिन से जवन बकतूत आ गलथेथरई...

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चिन्ता में झटकल जात एह देश के राजनीतिक जमात (बतकुच्चन – ११८)

बरखा के मौसम बा. झटास झटहा जस लागे लागत बा. बरखा के पानी के बौझार जब हवा के झोंका से उड़ के एने ओने आवेला त ओकरा के झटास कहल जाला. . झटास संगे आइल पानी के बूंद कबो कबो चोट जइसन लागेला बुझाला कि केहु झटहा चला के मारत बा. झटहा छोट...

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कबीर, भोजपुरी एवं चंपारण

– संतोष कुमार नवीन जागरण युग के अग्रदूत के रूप में हिंदी साहित्य में स्थापित “कबीर” आजु जनता के हृदय में व्यक्ति के रूप ना बलुक प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित बानी. भगवान् बुद्ध के बाद उत्तर भारत में सामाजिक क्षेत्र में नव...

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भोजपुरी के दसा अउर दिसा एतना जल्दी ना सुधरी महराज…..‏

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” भोजपुरी के बहुत जल्दी मिल जाई भाखा के दरजा….बहुते जानल-मानल भोजपुरिया लोग तन-मन-धन से भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता दिउवावे खातिर कमर कसि लेले बाटे लोग….सराहनीय कदम बा…काम...

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