Category: भाषा

बड़ बड़ भूत कदम तर रोअसु मुआ माँगे पुआ (बतकुच्चन ११२)

सत्ता के सटहा सट्टा के सटाकी साट दिहलसि पोसुआ मीडिया पर. एगो भोजपुरी कहाउत ह कि बड़ बड़ भूत कदम तर रोअसु मुआ माँगे पुआ. बाकिर बड़का भूतन पर से धेयान हटावे खातिर कवनो ना कवनो मुआ के खोज निकाले के पड़िए जाला. पिछला कई दिन से चौबीस...

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बजलऽ ए शंख बाकिर बाबा जी के पदा के (बतकुच्चन – १११)

तीन गो कहाउत आ तीन गो चोर के कहानी. सोचत बानी कि पहिले कहनिए कह सुनाईं छोट क के. एगो गाँव में चोरी भइल, तीन गो चोर पकड़इले. राजा के जमाना रहे राजा का दरबार में पेशी भइल. राजा तीनो के बारे में जानकारी लिहलें. फेर पहिलका से कहलें,...

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बतिया पंचे के रही बाकिर खूंटवा रहिए पर रही (बतकुच्चन – ११०)

बतिया पंचे के रही बाकिर खूंटवा रहिए पर रही. आजु जब बतकुच्चन करे बइठल बानी त सामने टीवी पर अइसने कुछ बहस चलत बा. पंच त पंच महापंच के बात अनठिया देबे पर लागल बा सभे. आ हमहु एह पर बेसी कुछ ना कहब काहे कि कहल गइल बा कि जर जोरू जमीन...

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बतकुच्चन – १०९

हुकहुकी चलत बा. केकर? अब का कहल जाव कि केकर. ओने सरबजीत के त एने सरकार के. कब साँस रुक जाई केहु नइखे जानत. आ साँच कहीं त साँस त कब के रुक गइल बा. बस वेंटिलेटर के सहारे साँस चलत बा. केहु के वेंटिलेटर मशीन से, त केहु के बाहर से...

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बतकुच्चन – १०८

पान सड़ल काहे, घोड़ा अड़ल काहे, रोटी जरल काहे, लईका बिगड़ल काहे ? एह चारो सवाल के एके जवाब कि, फेरल ना गइल. पान के पत्ता के बारबार पलटत रहे के पड़ेला, ना पलटब त सड़े लागी. घोड़ा के बीच बीच में दउड़ावत रहे के पड़ेला, आदत छूट जाई त बीचे...

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