बतकुच्चन – ३६
पिछला बेर बँड़ेरी के चरचा पर बात खतम भइल रहे. बँड़ेरी ओह लकड़ी के बीम के कहल जाला जवन कवनो छान्हि भा पलानी के बीच से थमले रहेला आ ओकर दुनु सिरा दुनु तरफ खँभा भा दिवार पर टिकावल रहेला. अब देखीं कि कइसे तनी मनी का हेर फेर से दू गो...
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