चार गो गजल
– बरमेश्वर सिंह (एक) सोच जब सहक गइल, मन तनी बहक गइल। जे रहे दबल-दबल, आग उ दहक गइल। चांद के...
Read More– बरमेश्वर सिंह (एक) सोच जब सहक गइल, मन तनी बहक गइल। जे रहे दबल-दबल, आग उ दहक गइल। चांद के...
Read More– स्व. कैलाश चौधरी गीत-1 दुनिया बा झुठहूं के मेला, झमेला से दूर रहऽ सजना. भाई बन्धु नाती...
Read More– श्याम कुंवर भारती (राजभर) बदरा घिरी घिरी आवे झुर झुर सवनवा ना। पिया बिना जिया नाही लागे...
Read MorePosted by Editor | May 20, 2024 | कविता, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
एहसास मर गइल बा – डॉ इकबाल एहसास मर गइल बा, जिंदा शरीर बाटे। धुँधला गइल बा अक्षर, खाली लकीर...
Read More– पप्पू मिश्र ‘पुष्प’ बिहार में का नइखे ! राम के प्रताप बा शोक बा संताप बा कृपा...
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