Category: कविता

आधुनिक नारी

– लाल बिहारी लाल कवन भूल भइल हमसे भारी विधाता दिहल तू अइसन नारी बात-बात पर गाल बजावे कह कछुओं तS आंख देखावे कलजुग के अइसन नारी विधाता दिहल तू…….. गहना किन तS खुस हो जाली सारी किन तS उS बरी सरमाली बुझसS ना कवनो...

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हेराइल आपन गाँव

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी कोइला से पटरी पचरल ले के शीशी घोटल सांझी खानि घरे मे माई ले रगड़ के मुंहो पोछल बा के इहवाँ जे दुलराइल नइखे । माई के झिड़की खातिर माटी मे सउनाइल खाड़ हँसे बाबूजी बबुआ बा भकुयाइल अब्बो ले भुलाइल नइखे ।...

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चैन लगे बेचैन (उलटन)

– अशोक द्विवेदी ना जुड़वावे नीर जुड़-छँहियो में, बहुत उमस लागे. चैन लगे बेचैन, देश में बरिसत रस नीरस लागे! बुधि, बल, बेंवत, चाकर… पद, सुख, सुविधा, धन, पदवी के लाज, लजाले खुदे देखि निरलज्ज करम हमनी के बुढ़वा भइल...

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चइता

– देवेंद्र आर्य आइ गइल चइत महिनवा हो रामा पिंहके परनवा। चिठिया लिखवलीं , सनेसवा पढवलीं आधी आधी रतिया ले रहिया रखवलीं नाहीं अइलें हमरो सजनवां हो रामा पिंहके परनवा। बेलिया फुलाले , चमेलिया फुलाले केतनो जतन करीं बात छितराले...

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दू गो गीत

– अक्षय कुमार पाण्डेय (1) बसन्त चमचम चमके लागल पीतर सोना जइसन भाई – समझऽ अब बसन्त आइल हऽ। पुरुवा से पछया झगरत बा दुपहर साँझ फजीरे, पाथर के रसरी रगरत बा हँसि-हँसि धीरे-धीरे, उतर गइल पानी इनार के उकचे लागल काई, समझऽ अब...

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