श्रेणी: कविता

गीत

– मनोज भावुक बोल रे मन बोल जिन्दगी का ह … जिन्दगी का ह . आरजू मूअल, लोर बन के गम आँख से चूअल आस के उपवन बन गइल पतझड़, फूल -पतई सब डाल से टूटल … साध- सपना के दास्तां इहे , मर के भी हर बार — मन के अंगना में...

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चइता

– डॉ.कमल किशोर सिंह चिकित्सक के चइता रामा कहेलें कन्हैया सुनहो प्यारी राधिका हो रामा हमरा के – मक्खन अब ना खियाव हो रामा हमरा के —— रामा खाई के मक्खनवा बढ़वनी वजनवा हो रामा , रक्त-चाप – रक्त- चाप...

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झरताटे चानी के फुहार

– बद्री नारायण तिवारी ‘शाण्डिल्य’ डम-डम डमरू बजावता सावनवा, झरताटे चानी के फुहार. ओढ़ले अकास चितकबरी चदरिया, मांथवा पर बन्हले बा धवरी पगरिया, झरताटे मउसम जटवा से मोतिया, गेरू रंग कान्हवा पर भिंजली कांवरिया, पियरी पहिरि बेंग...

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कुछु समसामयिक दोहा

– मुफलिस देइ दोहाई देश के, लेके हरि के नाम. बनि सदस्य सरकार के, लोग कमाता दाम.. लूटे में सब तेज बा, कहां देश के ज्ञान. नारा लागत बा इहे, भारत देश महान.. दीन हीन दोषी बनी, समरथ के ना दोष. सजा मिली कमजोर के, बलशाली निर्दोष.....

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चइत के छन्द – चइता

– डा॰अशोक द्विवेदी कोइलरि कूहे अधिरतिया आ बैरी चइत कुहुँकावे. रहि रहि पाछिल बतिया इ बैरी चइत उसुकावे. कुरुई-भरल-रस-महुवा, निझाइल कसक-कचोटत मन मेहराइल उपरा से कतना सँसतिया, आ बैरी चइत कुहुँकावे. फगुवा गइल दिन कटिया के आइल...

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