उमेद
– संतोष कुमार पटेल जरल रोटी गरहन लागल चान बाकिर आस मरल ना कहियो त होई बिहान. राहू लागले ना रही हटबे करी आ भूख के रात कटबे करी. एही उमेद पर जिनिगी चलले. करेजा वाला जिएला डरपोक हाथ मलेला ओठ झुराला फाटेला जेठ के खेत नियर...
Read More– डॉ. कमल किशोर सिंह तनि सुनी एगो बात, नाहीं झूठ, कहीं सांच. रउआ बिना आपन जिनिगी पहाड़ लागेला. काटे धावे घर, नीक लागे ना बाहर, जगवा में सब कुछ बेकार लागेला. रतिया के बतिया सुनाई का संघतिया, दिनवो में हमरा अन्हार लागेला....
Read More– नूरैन अंसारी बहत बिया सर-सर पुरवा बयरिया. धधकत बा आग, चले लू के लहरिया. घर से कहीं निकलल मोहाल भइल बा. भाई हो गर्मी से जिअरा बेहाल भइल बा. लागत बा चईत जइसे जेठ के महीना. चुअत बा माथा से तर-तर पसीना. किरपा अइसन करत बाड़ी...
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