बे जनले नचला पर गोड़ टूटेला
– जयंती पांडेय रामचेला बड़ा उदास रहले. बाबा लस्टमानंद पूछले कि का हो मुँह काहे लटकवले बाड़ऽ ? रामचेला कहले, ई मीडिया वाला भाई लोग केहू तरह जीये ना दी. अब देखऽ ना, ओह दिन राजघाट पर अनशन पर बइठल भाजपाई भाई लोग के उदासी मेटावे...
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