Category: सतमेझरा

निरउठ

– डा. अशोक द्विवेदी दिल्ली फजिरहीं पहुँच गउवीं. तर-तरकारी कीने क बेंवत ना बइठुवे त सोचुवीं आलुवे-पियाज कीनि लीं. दाम पुछते माथा घूम गउवे. साठ रुपिया किलो पियाज रे भइया. हम सोचुवीं..”बकसs ए बिलार ,मुरुगा बाँड़े होके...

Read More

घूर का घुरची में घुरचियाइल (बतकुच्चन – 193)

जय हो बाबा लस्टमानंद के! पिछला अतवार के घूर के चरचा में अइसन टीप दिहलन कि सोचल धरा गइल आ हम घूर का घुरची में घुरचिया के रह गइनी. सोचे लगनी त लागल कि आखिर हम बतकुच्चन में करेनी का, घुरबिनिया छोड़ के. बाकिर घूर आखिर कइसे अतना...

Read More

कमान आ कमीना का बहाने (बतकुच्चन – 192)

भासा संस्कार से बनेला आ संस्कार भासा से. भासा संस्कार देखावेले आ संस्कार भासा के इस्तेमाल के कमान सम्हारेले. कमान सम्हारे खातिर कई बेर कमानी चढ़ावे पड़ेला आ कई बेर कमाने से काम चल जाला. एह कमाने आ कमाई वाला कमाने के कवनो संबंध...

Read More

फेस बुक के दुखिया

– जयंती पांडेय ओह दिन साइत बिगड़ल रहे कि आंगछ खराब रहे. गाँव के लरिका मधुमाछी के छत्ता में ढेला मार के परइले सन. ओने रामचेला जेठ के दुपहरिया में पछुआ के झोंका के कम करे खातिर आँख मुलमुलावत पेड़ का नीचे आगे के ठाड़ भइल...

Read More

लीनक्स आ विंडोज का बहाने भोजपुरी के चरचा (बतकुच्चन – 190)

कंप्यूटर के दुनिया में दू तरह के साफ्टवेयर होला. एगो त प्रोप्राइटरी, जवना के मलिकान कुछ खास लोग का लगे होला आ उहे लोग तय कर सकेला कि एहमें का रही, कइसे रही, का करी वगैरह. दोसरका होला ओपन सोर्स, जवना के मलिकान केहू का लगे ना...

Read More


अंजोरिया पर खोजीं -

आपन टिप्पणी, लेख, कहानी, कविता, विचार भेजे खातिर -

anjoria@rediffmail.com

अगर राउर रचना पहिला बेर आ रहल बा त आपन एगो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ में जरूर डाल दीं.

Recent Posts

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..

🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

🌐 ChatGPT से खुद बातचीत करीं – आ देखीं ई कइसे रउरो रचना में मदद कर सकेला।