सत्य-अहिंसा के पुजारी : महात्मा गांधी

सत्य-अहिंसा के पुजारी : महात्मा गांधी

– प्रो.(डॉ.) जयकान्त सिंह ‘जय’

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महात्मा गांधी अपना जीवन दर्शन के बारे कहलें बाड़ें कि ” अपना जीवन में कइल हमार आपन प्रयोगे हमार जीवन दर्शन बा. हम जवन चीज भारतीय चाहे पच्छिमी सद्ग्रंथन में पढ़नीं, ओकरा में जवन-जवन विचार-दर्शन हमरा संवेदनशील हृदय आ विवेकशील मस्तिष्क का, प्राणी मात्र खातिर जरूरी आ उपयोगी लागल, ओकरा के अपना जीवन में उतारे के भरपूर प्रयास कइनीं. ”

महात्मा गांधी द्वारा अपने आप पर स्वघोषित एह विचारन के सही-सही जानकारी तबे मिल सकेला, जब उनका जीवन यात्रा का एक-एक पड़ाव-पक्ष के सकारात्मक नजरिया से, बारीक अध्ययन कइल जाए. उनका के सत्य-अहिंसा के पुजारी के रूप में दुनिया जानेला . एकर वजह ई बा कि ऊ जीवन का हर परिस्थिति में अपना कवनो अभियान भा आंदोलन के दरम्यान सत्याचरण आ अहिंसावादी संघर्ष के, साधना के रूप में अपनवलें. जब ऊ आपन आत्मकथा लिखलें त ओकर नाम रखलें-सत्य के साथ मेरे प्रयोग ( My Experiments with truth ).

उनका खातिर सत्य-अहिंसा कवनो किताबी ज्ञान भर ना रहे, बल्कि जीवन-यात्रा के पग-पग पर विचार आ बेवहार के कसउटी पर कसाए जोग मूल्यबोध रहे. तबे त बीसवीं सदी के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन उनका बारे में कहले रहस कि, “आवे वाली पीढ़ी शायदे विश्वास करे कि एह धरती पर हाड़-मांस के अइसनो आदमी कबो चलल रहे.”

सत्य-अहिंसा के सङ्गे महात्मा गांधी के आजीवन वैचारिक आ व्यावहारिक लगाव के जान के, खुद का जीवन में उतारे खातिर उनका जीवन से जुड़ल कुछ पारिवारिक, शैक्षिक, धार्मिक, आ राजनीतिक पक्षन पर बात कइल जरूरी बा.

महात्मा गांधी के जनम 02 अक्टूबर, सन् 1869 ई. के काठियावाड़-गुजरात के पोरबंदर नाम के नगर में भइल रहे. पिता करमचंद गांधी आ माता पुतलीबाई के परिवार वैष्णव धर्म के माने वाला रहे. ऊ बचपन से अपना धर्मपरायण मतारी से प्रेरक लोककथा, पौराणिक नचिकेता, सावित्री-सत्यवान, रामायण-महाभारत आदि के कथा सुनके बड़ भइल रहस. गाँव-जवार में होखे वाला खेल-तमाशा आ नाटक-नौटंकी देखे में उनकर खूब मन लागे. ओही लइकाईं के अवस्था में ऊ सत्य हरिश्चन्द आ श्रवण कुमार के नाटक देखले रहस. जवना के प्रभावित होके ऊ बचपने में सत्य आ सेवा के व्रत ले चुकल रहस. एक बेर बाल बुद्धि बस एगो अतिथि के जेब से कुछ पइसा निकाल लिहले रहस त अपना मन-मानस पर मतारी के सुनावल प्रेरक लोककथा आ सत्य हरिश्चन्द नाटक के पड़ल प्रभाव के चलते ऊ अपना ओह अपराध के छुपा ना सकलें अउर अपना पिता के चिट्ठी लिखके आपन गलती बतावत ओकरा खातिर दंड के माँग कइलें. पिता भावुक होके उनका के गले लगावत उपदेश दिहलें कि सत्य वचन आत्मशुद्धि के साधन ह. भले ओकरा से कतनो अपमान भा पीड़ा काहे ना मिले.

महात्मा गांधी के पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी रहे. उनकर प्रारंभिक पढ़ाई गाँव के पाठशाला में मातृभाषा के माध्यम से प्रारंभ भइल रहे. बाद में अंगरेजी इस्कूल में नाम लिखाइल आ उहँवे उनका संस्कृत आ धार्मिक ग्रंथनों के पढ़े के अवसर मिलल. तेरह बरिस के उमिर में मैट्रिक करत समय उनकर बिआह कस्तुरबा जी के सङ्गे हो गइल.   सन् १९८७ ई. में हाई इस्कूल के पढ़ाई पूरा कइला के बाद ऊ कानून के पढ़ाई करे इंग्लैंड गइलें. उहाँ से बैरिस्टरी के पढ़ाई पूरा कइला के बाद वापस भारत आके ऊ बम्बई में वकालत आरंभ कइलें. बाकिर संकोची स्वभाव के चलते ढ़ंग से वकालत ना कर पावस. फेर सन् 1893 ई. में एगो मुकदमा के पैरवी खातिर दक्षिण अफ्रीका गइलें. उहाँ उनका अपना पेशा में सफलता मिलल. बाकिर उहाँ भारतीय जनता पर रंग- भेद आदि अनेक कारण से होत अन्याय-अत्याचार के देखके सत्य आ अहिंसा के राह पर चलत ओकरा विरुद्ध लड़े आ आंदोलन करे के संकल्प लेवे के पड़ल. एकरा खातिर ऊ सन् 1894 ई. में ‘ नेटाल इंडियन नेशनल कांग्रेस ‘ के स्थापना कइलें. ऊ अपना सत्य-संकल्प आ अहिंसक संघर्ष के बदौलत भारतीय समाज के संगठित करके हर अन्याय-अत्याचार के विरूद्ध आंदोलन चलाके अद्भुत सफलता पवलें. जवन उनका के भीतर से आउर मजबूत बनावत चल गइल. जवना के प्रयोग ऊ आजीवन अपना देश के स्वतंत्र बनावे आ समाज के शिक्षित-जागरूक बनावे खातिर चलावल हर सामाजिक-राजनीतिक अभियान आ आंदोलन के दरम्यान कइलें. जवना में उनका भरपूर सफलता मिलत गइल. उनका ओह तमाम सफलता से प्रभावित होके मार्टिन लूथर किंग जूनियर उनका के अहिंसक संघर्ष के विश्वगुरु घोषित करत कहले रहस कि, “महात्मा गांधी दुनिया के सिखवलें कि सत्य आ अहिंसा उत्पीड़ितन खातिर सबसे शक्तिशाली हथियार हो सकेला.”

गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से सन् 1896 ई. में सपरिवार भारत वापस आ गइलें. बाकिर सन् 1897 ई. में उनका फेर दक्षिण अफ्रीका जाए के पड़ल आ उनका भारतीयन पर होत अत्याचार के विरुद्ध फेरु से आंदोलन चलावे के पड़ल. सन् 1914 ई तक ऊ दक्षिण अफ्रीका में भारतीय जनता के स्वतंत्रता खातिर सत्याग्रह के व्रत लेके कई गो अहिंसक आंदोलन चलवलें. उनका सामाजिक उत्थान खातिर ‘ फोनिक्स ‘ नाम के आश्रम स्थापित कइलें. जवना के धर्म संस्था ( Religious Institution ) के नाम देत ओकरा माध्यम से सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, ब्रह्मचर्य आदि के शिक्षा दिहल जात रहे.

जब महात्मा गाँधी सन् 1915 में वापस भारत अइलें त उनका द्वारा दक्षिण अफ्रीका में चलावल आ सफल भइल आंदोलन के गाथा इहँवो गवात रहे. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में लागल भारतीय जन-मन उनका के हाथो हाथ लिहल. देश के आजादी के लड़ाई में लागल भारतीय समाज आ कांग्रेस आदि संगठन उनकर पूरजोर स्वागत कइल. कांग्रेस का अधिवेशनन में लोग उनका के चाव से सुने लागल. उनका विचार पर अमल करत आंदोलन आगे बढ़े लागल. फेर गाँधी जी सउँसे भारत के यात्रा करके देश के जमीनी समस्या आ समाधान के देखत राह के अवलोकन कइलें.

बिहार के चम्पारण में अंगरेजन द्वारा जबरन किसानन से नील के खेती करवावल जात रहे. जनता एक ओर गरीबी से हलकान रहे आ दोसरे गोरन का अत्याचार से परेशान. फेर पंडित राजकुमार शुक्ल से चम्पारण का किसानन पर होत अत्याचार के जान के गाँधी जी चम्पारण गइलें आ अंगरेजन का अत्याचार से किसानन के मुक्ति दिलवावे खातिर सन् 1917 ई. में बिहार के स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी, वकील, बुद्धिजीवी सामाजिक कार्यकर्ता लोग के सहयोग से चम्पारण सत्याग्रह आरंभ कइलें. जवना में उनका भारी सफलता मिलल. एकरा बाद अंगरेजी हुकुमत से देश के आजादी दिलावे खातिर सन् 1922 ई. में असहयोग आंदोलन, सन् 1930 ई. में नमक सत्याग्रह, सन् 1942 ई. ‘ अंग्रेजो भारत छोड़ो ‘ के नारा देत जनता से ‘ करो या मरो ‘ के आह्वान करत आंदोलन तेज करे में अहम् भूमिका निभवलें. देश के आउर स्वतंत्रता सेनानियन के सङ्गे-सङ्गे उनका आंदोलन के बदौलत भारत 15 अगस्त, सन् 1947 ई. के आजाद हो गइल आ दुनिया भर में सत्यव्रती महात्मा गांधी का अहिंसक आंदोलन का सफलता के गाथा गवाए लागल. अपना तमाम सामाजिक, राजनीतिक आ धार्मिक अभियान-आंदोलन के दौरान ऊ कबहीं अपना सत्य आ अहिंसा के राह से ना भटकलें. जवना के चलते उनका जियते जी दुनिया के बड़-बड़ विचारक, चिंतक, दार्शनिक, वैज्ञानिक आदि अनेक विशेष संबोधन से संबोधित कइल लोग.

रवीन्द्र नाथ ठाकुर उनका के “महात्मा” कहत भारतीय आत्मा के जगावे वाला आ भारतीय आत्मचेतना के जाग्रत स्वर बतवले रहलें. यूरोपीय दार्शनिक, शिक्षाविद् साहित्यकार लियो टॉलस्टाय का कहे के पड़ल कि “गाँधिए जइसन व्यक्ति ईसा मसीह का शिक्षा के जिन्दा रखले बा.” अफ्रिकन राजनेता नेल्सन मंडेला महात्मा गांधी के प्रेम, दया आ सत्य-अहिंसा आधारित स्वतंत्रता आंदोलन आ ओकरा में मिलल सफलता के ओर दुनिया के ध्यान दिलावत कहलें कि ” स्वतंत्रता के लड़ाई दुश्मन से बिना घृणा कइले जीतल जा सकेला. ई महात्मा गांधी दुनिया के बतवलें. ” सत्य-अहिंसा का ओह महान पूजारी के हम बार-बार नमन करत बानीं.

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प्रो. जयकान्त-सिंह-जय,
विभागाध्यक्ष-स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग, बी. आर. अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर ( बिहार )

पिनकोड-842001
राष्ट्रीय महामंत्री, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, पटना ( बिहार )
ई-मेल-indjaikantsinghjai@gmail.com

आवासीय पत्राचार-‘प्रताप भवन ‘महाराणा प्रताप नगर
मार्ग सं. -1( सी ) भिखनपुरा, मुजफ्फरपुर ( बिहार )
पिनकोड-842001

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