– टीम अंजोरिया
#sexy #erotic #vulgar #ethical #legal
चलीं दूअर्थी गाना सुनल जाव
sexy erotic vulgar ethical legal

एने कुछ दिन से दूअर्थी आ अश्लील गीत गवनई के चरचा कवनो ना कवनो बहाने भोजपुरी में दुनिया के पहिलका वेबसाइट अंजोरिया डॉटकॉम पर चल रहल बा। शुरुए से हम एह बात के खुलेआम समर्थक हईं कि भोजपुरी में अश्लीलता से हमरा कवनो परहेज नइखे। आ एहिजे जरुरी हो जाला कि सबसे पहिले त अश्लील के अर्थ आ ओकर परिभाषा जानल जाव। दूअर्थी के शानदार उदाहरण एह दू लाइन में देख सकिलें –
सुबरन को तीनो ढूंढ़े
कवि कामी और चोर।
सुबरन एक शब्द ह जवना के अलग अलग लोग अलग अलग अर्थ से जानेला। कवि सुन्दर सुन्दर शब्द – सु-वर्ण खोजेलें। कामुक कामी आदमी सुन्दर सुघड़ काया खोजेला आपन काम पिपासा शान्त करे खातिर। आ चोर त सुबरन – स्वर्ण – के तलाश में लागले रहेला।
हालही में शेयर बाजार में एगो बड़हन गिरावट देखे के मिलल। एह गिरावट का पाछा कई गो कारण रहलीं सं बाकिर रोवे के रहनी तबले अँखिए खोदा गइल वाला अंदाज में बाजार गिरे के बहाना खोजते रहल जब देश के सबले बड़हन निजी बैंक एचडीएफसी के पार्ट टाइम चेयरमैन इस्तीफा देत लिख दिहलन कि कुछ अइसन हो रहल बा जवन उनुका ला अनैतिक रहुवे। बाद में ऊ एगो साक्षात्कार में हालांकि एह बात से मुकर गइलन कि बैंक का काम में कुछ अनैतिक होत रहुवेे। रउरो जानते होखब कि अनैतिक आ गैरकानूनी अलग अलग होला। कवनो जरुरी ना होखे कि जवन काम अनैतिक होखो ऊ गैर कानूनिओ होखो। ठीक वइसहीं जइसे रेलगाड़ियन के डिब्बा में लिखल मिल जाला कि उचित आ पर्याप्त कारण के बिना जंजीर खींच के गाड़ी रोकवावे वाला पर जुर्माना आ जेल दुनू हो सकेला। कवनो जरूरी नइखे कि रउरा जवन उचित लागो ऊ पर्याप्तो कारण होखो भा जवन पर्याप्त लागो ऊ उचितो कारण होखो। राउर रुमाल गिर गइल त ओकरा के उठावे ला गाड़ी रोकवावल रउरा ला उचित हो सकेला बाकिर रेलवे ला पर्याप्त कारण ना होखी। वइसहीं कवनो चोर दोसरा के सूटकेस चोरा के उतरे खातिर ट्रेन रोकवा देव त ई ओकरा ला पर्याप्त कारण रही बाकिर रेलवे ला उचित ना।
अब रउरा कहब कि का मथैला देख के पढ़े-सुने अइनी आ का मिल रहल बा पढ़े-सुने खातिर। राउर शिकायत जायज बा बाकिर अगर हम एही बतकुच्चन ला रउरा के बोलावल चाहीं त शायद बहुते कम लोग आई। बाकिर मथैला देख के बहुते लोग आई। भोजपुरी एक त वइसहूं बदनाम क दिहल गइल बिया अपना कामुक गीत गवनई का चलते । मुन्नी बदनाम हुई का अन्दाज में कहीं त भोजपुरी बदनाम हुई भोजपुरिया तोहरा चलते। आम भोजपुरिया आनन्द लेबे आवेला भोजपुुरी गीत-गवनई सुने खातिर। ऊ सत्संग सुने ना आवे। सत्संग सुने वाला लोग अलग होला आ मुजरा सुने वाला लोग अलग। सत्संग सुने वाला मुजरा सुने ना आई त मुजरा सुने वाला सत्संग सुने ना जाई।
भोजपुरियन का बीचे एगो फैशन बन गइल बा अपने माई भाषा के बदनाम करे के। भोजपुरी विरोधी हिन्दी फिल्म गिरोह भा हिन्दी संगीत गिरोह के साजिश में अझूरा के आम भोजपुरिया कउवा कान ले गइल सुनते कउवा का पाछा धावे लागल। ई देखे के कोशिश ना कइलसि कि कान बा कि सचहूं ले गइल।
रउरा गीत खास कर के दूअर्थी गीत सुने आइल बानी त अँउजाई जिन, हम रउरा के ढेरहन गीत सुनवावे वाला बानी। एगो लमहर लिस्ट बना के बइठल बानी। बाकिर ओकरा पहिले रउऱा ई जाने के चाहीं कि फूहड़, अश्लील, दूअर्थी, कामोत्तेजक शब्दन के सही तरीका से इस्तेमाल करीं। फूहड़ मतलब Clumsy (बेढंगा/अनाड़ी), Slovenly (मैला/गंदा), Untidy (अव्यवस्थित), Awkward (ऑकवर्ड) होला। जवन रउरा फूहड़ लागो जरूरी नइखे कि हमरो ला फूहड़ होखे। अश्लील त अउरी बेदर्दी से निपटा दिहल जाला। अश्लील माने जवन आदमी भा चीझु भा कवनो रचना श्लील ना होखो। श्लील मतलब सभ्य, सुशिक्षित होला। बाकिर कतना आदमी अतना सभ्य आ सुशिक्षित होलें। आम आदमी अपना सुभाव से अश्लीले होला।
एहिजे अगर गूगल के उद्धरण देत लिखीं त –
‘चोदना’ (Chodana) का मूल संस्कृत अर्थ प्रेरणा प्रोत्साहन, आगे धकेलना या निर्देश देना है, जो ‘चुद्’ धातु से बना है। वैदिक ग्रंथों में यह कर्म या क्रिया के लिए प्रेरणा (जैसे ‘प्रचोदयात’) के रूप में प्रयोग होता है। आधुनिक हिंदी में, यह शब्द आमतौर पर सेक्स या संभोग (coitus) के अर्थ में प्रयोग किया जाने वाला एक अश्लील शब्द बन गया है।
चोदना विद्वानन ला अलग होखेला आ आम आदमी ला आम बोलचाल में अलग अर्थ में ले लिहल जाला। त एकरा में ओह शब्द के का दोष? दोष त ओकर माने के चाहीं जे ओकर इस्तेमाल गलत अर्थ में कर रहल बा।

अब एह विषय के पता ना कतना लमहर ले खींचल जा सकेला। आजु हम चुनौती देबे आइल बानी कि ओह साहित्यकारन के उद्धरण दीं जे हिन्दी के अश्लील, फूहड़, दूअर्थी गीतन ला बदनाम करे के तईयार होखो। हमरा रउरा त लाज लागे के चाहीं कि बिना पूरा समुझले हमनीका अपने माईभाषा के बदनाम कर रहल बानी। कुछ हिन्दी गीतन के उदाहरण नीचे दे रहल बानी। लिंक पर क्लिक क के ओकरा के सुन सकिलें।
मु्न्नी बदनाम हुई
बात थी यार एक बेर की
चोली के नौचे क्या है
जुम्मा के जुम्मा
अठारह बरस की तू होने को आई रे
ये माल गाड़ी तू धक्का लगा
खड़ा है खड़़ा है
डालूंगा डालूंगा
अब एह हिन्दी गीतन का बादो मन ना भरल होखे त लीं बालेश्वर के गवनई सुन लीं –


0 Comments