नीतीश के खेला चालू बा

– टीम  अंजोरिया

#नीतीश-कुमार #राज्यसभा #मुख्यमंत्री # बिहार #भोजपुरी

नीतीश के खेला चालू बा

Nitish drama is not yet over

screen-shot of Nitish Kumar Expression on x.com

पिछला 25 बरीस में बिहार के मुख्यमंत्री का रूप में दस बेर किरिया धरे वाला नीतीश कुमार के रिकार्ड पूरा देश में केकरो लगे नइखे । कह सकिलें कि दुनिया भर में अइसन नमूना ना मिली। आ सबले बड़हन खासियत ई कि उनुका के समर्थन देबे वाला गठबन्हन बदलत गइल बाकिर चीफ मिनिस्टर के कुरसी पर नीतीशे विराजमान रहलन। एही से पिछला बेर चुनावी नारा रहल – बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है।

आ उहे नीतीश कुमार अचके में तइयार हो गइलन मुख्यमंत्री के कुरसी छोड़ के राज्यसभा सांसद बने खातिर। अब ई बात पता ना लोग के कइसे सहज लागत बा? लोग एक्स डॉटकॉम पर उनुके एक्सप्रेशन के किरिया खात बा कि खबर साॅच बा आ नीतीश कुमार पर कवनो दबाव ना डालल गइल ऊ अपने से एह बाति के फैसला कर लिहलन। एक्स पर नीतीश लिखलन कि –

आ उनुकर एही बयान का सहारे आपन बात कहल चाहत बानी। आ आगा बढ़े से पहिले एगो छोटहन कहानी सुनावल चाहत बानी। दियरा के एगो गाँव में सबेरे देखल लोग कि रेती पर बड़हन बड़हन गोल-गोल निशान पड़ल बा जवन नदी का ओरि जा के खतम हो जात बा। केहू के बुझइबे ना करे कि ई कवना तरह के निशानी हऽ, कवना जनावर के गोड़ हऽ। एही उधेड़बुन में लोग गाँव के अकिला फुआ के बोलावल। अकिला फूआ अपना अकिल खातिर जानल जात रही। अइली आ गौर से सगरी निशान देखली। फेर कहली – ‘ई बुझउवल हमरा छोड़ अउर ना बूझी कोय, हो न हो गोड़ में जाँता बान्ह के मूसा कूदा होय!’ आ लोग मान गइल।

ओही अकिला फुआ के एगो चेला होखला का नाता हमहूं नीतीश के ले के आपन बात बतावल चाहत बानी। बाकिर पहिले ई जान लीं कि नीतीश कब कब बिहार के मुख्यमंत्री पद के किरिया धइलन। पहिला बेर 3 मार्च 200 के, दूसरा बेर 24 नवम्बर 2005 के, तिसरा बेर 26 नवम्बर 2010 के, चउथा बेर 22 फरवरी 2015 के, पँचवा बेर 20 नवम्बर 2015 के, छठवां बेर 27 जुलाई 1017 के, सतवां बेर 16 नवम्बर 2020, अठवां बेर 10 अगस्त 2022 के, नउवां बेर 28 जनवरी 2024 के, आ दसवां बेर 20 नवम्बर 2025 का तारीख के। एह दस बेर में से पांँच बेर नवम्बर रहुवे।

त अइसनका काईयाँ राजनेता कुरसी छोड़े के तईयार हो गइल एह पर रउरा होखो भा ना बाकिर हमरा अचरज जरुर होत बा। अगर नीतीश के हटा के उनुका बेटा के मुख्यमंत्री बनावल जाव त अचरज कइला के जरुरते ना रही। थोड़ देर ला हमहूं मान लेत बानी कि नीतीश सचहूं अपना एक्सप्रेशन में लिखले बाड़न कि –
“संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूँ।”

त राज्यसभा के सदस्य बने के आपन साध पूरावे खातिर नीतीश तईयार हो गइलन राज्यसभा जाए ला। बाकिर तब अपना पद से त्यागपत्र काहे ना दिहलन ? का उनुका संदेह बा कि पता ना जीतिहे कि ना? जबकि उनुकर जीतल तय बा अगर ऊ अपने अपना गोल के विधायकन के मना ना कर देसु। नीतीश कुछऊ कर सकेलें बाकिर एहिजा हमहूं मानत बानी कि अपना जीत पर नीतीश के कवनो संदेह ना होखे के चाहीं। बाकिर अगर साधो पूरा जाव आ कुरसियो ना छोड़े के पड़े तब ? एहिजे नीतीश के पिछला चरित्र देखि के हमरा लागत बा कि – गोड़ में जाता बान्ह के मूसा कूदा होय!

कहीँ अइसन त नइखे कि नीतीश के मन में बा कि राज्यसभा के सदस्यो बन जासु आ बिहार के मुख्यमंत्रिओ बनल रहि जासु! आखिर राज्यसभा के सांसद बनला का बाद 14 दिन के समय बा उनुका लगे विधान परिषद के सदस्यो बनल रहे के आ बिहार के मुख्यमंत्रिओ बनल रहे के। का ई ना होखी कि राज्यसभा के सांसद बन गइला का बाद ऊ राज्यसभा से इस्तीफा दे देसु आ बिहार के मुख्यमंत्री बनले रह जासु? एही योजना का तहत ऊ मुख्यमत्री पद से त्यागपत्र ना देके राज्यसभा सदस्यो बन लिहल चाहत बाड़न आ आपन साध पूरा के मुख्यमंत्री पद पर आखिरी साँस ले मौजूद रह जासु!

अब एह जोड़ के अटकरपचीसा केहू अउर लगा सकत होखो त जरुर लगावे बाकिर हम त अकिला फुआ जिन्दाबाद करत अपना बाति पर कायम बानी।

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