– टीम अंजोरिया
#standard-bhojpuri #मानक-भोजपुरी
भोजपुरी के मानक का राह में
suggestion for bhojpuri standardisation
बिर्हनी के छत्ता में ढेला मारल हमार आदत हवे। आजु फेर एगो ढेला मारे जात बानी। अलगा बाति बा कि मधुमाखियन के सुभाव बदल गइल बा। ढेला मरलो का बाद हनहनात नइखी सँ।

आम भोजपुरियन ला एगो उदाहरण परोसत बानी –
- एकाखरी शब्दन का साथे अवग्रह निशान भा विकारी चिह्न ‘ऽ’ लगवला के जरूरत नइखे।
- जबले अर्थ के अनर्थ होखे के अनेसा ना होखे तबले एह विकारी चिह्न से बाचे के चाहीं।
- अवग्रह निशान का जगहा कवनो शब्द का आखिर में ‘अ’ लिखला के जरुरत नइखे।
जइसे कि आवऽ का जगहा आवा (आव+अ) चलऽ का जगहा चला (चल+अ) गलत प्रयोग माने के चाहीं। - हर तत्सम शब्द के तद्भवीकरण जरुरी ना होखे। हँ अगर बिना संयुक्ताक्षर के सहज भाव में ओकर तद्भव शब्द लिखल जाव त अच्छा रही। जइसे कि ‘स्वीकार लेबे के चाहीं’ का जगहा ‘सकार लेबे के चाहीं’ उत्तम रही।
- मूल रुप से हिन्दी में लिखल रचनन के भोजपुरीकरण ना होखे के चाहीं। ओकर सहज भोजपुरी अनुवाद भा उल्था स्वागत जोग होखी।
- भोजपुरी में संस्कृतनिष्ठ शब्दन का जगहा सहज रूप से आम बोलचाल में बोलल जाए वाला शब्दन के प्रयोग होखे के चाहीं।
- बाने, बाडे, बाड़े, बड़ुवे, बावे वगैरह का विवाद में पड़ला के जरुरत नइखे। हर इलाका के भोजपुरी में तनिका अन्तर बड़ले बा आ ओकरा के सहज भाव से सकार लेबे के चाहीं।
- श, स, आ ष के हर जगह स कइला से बचे के चाहीं। देश के देस लिखला में गलत कुछ नइखे बाकिर देश के देश लिखलो में कुछ गलत नइखे एह बात के सकारे के चाहीं।
- भोजपुरी में ‘भी’ आ ‘ही’ के प्रयोग करे से बचे के चाहीं जबले बहुते असहज ना लागे। ‘भी’ आ ‘ही’ भोजपुरी के सहज प्रवाह के बाधित करला। अपवाद के तरह कबो-कबार एकर उपयोगो के सहज भाव से सकार लेबे के चाहीं।
- भोजपुरी में संस्कृत का तरहे संज्ञा रुप बदल जाला. ‘नरेन्द्र मोदी ने कहा’ के ‘नरेन्द्र मोदी कहलन’ आ ‘नरेन्द्र मोदी का भी यही मानना है’ के ‘नरेन्द्रो मोदी इहे मानेलन’ आ ‘नरेन्द्र मोदी ने भी एक समय यही कहा था’ के ‘एक समय नरेन्द्रो मोदी इहे कहले रहन’ लिखे पढ़े के चाहीं। ‘हम त जा ही रहे थे’ का जगहा ‘हम त जाते रहनी’ भा ‘हमनीका त जाते रहनी’ लिखे के चाहीं।
- भोजपुरी में ‘मैं’ का जगहा (की जगह) ‘हम’ के प्रयोग होला (होता है) आ बहुवचन ‘हम’ का जगहा ‘हमनी’ आ ‘हम लोग’ का जगहा ‘हमनीका’ के प्रयोग उत्तम रही।
- ‘राम की किताब’ अउर ‘सीता की साड़ी’ का जगहा ‘राम के किताब’ आ ‘सीता के साड़ी’ बढ़िया रही।
- मास्टरनी आ मस्टराइन के अर्थ अलग होला। महिला शिक्षक के मास्टरनी आ कवनो शिक्षक के पत्नी के मस्टराइन कहल जाला। एही तरह डाक्टरनी आ डक्टराइन, हजामिन आ हजमाइन अपवाद होखी काहे कि हजाम के पत्निओ हजामिने होली हजमाइन ना। हँ अगर ऊ हजामिन के काम ना करे तब ओकरा के हजमाइन कहल जा सकेला। पुरनका जमाना में जाति कर्म आधारित होखत रहुवे। दुर्भाग्य से अब एकरा के जन्म आधारित बना दीहल गइल बा। एहसे जाति सूचक शब्दन के प्रयोग यथासंभव ना करे के चाहीं।
- विराम चिह्नन में रोमन विराम चिह्नन के प्रयोग अब सर्वमान्य बा तबहियो (तब भी) पूर्ण-विराम का जगहा फुलस्टॉप लगावल जरुरी नइखे। ई बहुते लोग ला असहज होला।
भोजपुरी लिखा-पढ़ी में कम बा त एसे ना कि लिखा-पढ़ी में कम बा, एसे कि बात-व्यवहार में जादे बा. आ जादे बा त जादे जन आ जादे जगह, दूनों में जादे बा.
– डॉ प्रकाश उदय
अब अगर रउरा एही तरह के कुछ अउर सुझाव दीहल चाहत बानी त दे दीं। ओकरो के एहमें शामिल कइला में खुशी होखी हमनी के।
– टीम अंजोरिया

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