जब पता ना चले कि बाझल बानी कि बझावल बानी (बतकुच्चन १५६)
समुझ में नइखे आवत कि बाझल बानी कि बझावल गइल बानी. बाकिर अतना त जरूर कह सकीलें कि अझुराइल नइखीं. बाझ भा बाझि के मतलब होला पेंच भा गाँठ भा काम के बोझा. आ जब आदमी ओह पेंच के खोले, सलटावे में लाग जाला त कहल जाला कि बाझल बा. हालांकि...
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