मुफ्तखोरी आ हरामखोरी – बतकुच्चन 235
मुफ्तखोरी आ हरामखोरी : बतकुच्चन सेतिहा के सेनूर, भर लिलार। कहाउत पुरान ह, बाकिर आदमी के स्वभाव...
Read Moreमुफ्तखोरी आ हरामखोरी : बतकुच्चन सेतिहा के सेनूर, भर लिलार। कहाउत पुरान ह, बाकिर आदमी के स्वभाव...
Read Moreभीख आ दान के फरक (बतकुच्चन -234) आदमी आपन इच्छा पूरा करे खातिर कवनो वस्तु, धन भा पद हासिल करे के...
Read Moreसमर्थक, प्रशंसक आ सहमत : तीन शब्दन के गोलमाल (बतकुच्चन- 233) राजनीति में जतना गोलमाल बा, ओकरा पीछे...
Read Moreपरिच्छेद, अनुच्छेद आ अध्याय : बतकुच्चन – 232 — तीनों अलग कि एके घर के सदस्य? मूल विषय त इहे...
Read MoreIn a nutshell – ‘religious occasion with fasting and or restrictions are vrata, whereas occasions without fasting or restrictions are utsava. Parva is a pious occasion with or without festivities and with or without fasting as well.
Read More
Recent Comments