ए अरियार, त का बरियार
- डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-61

आइल भोजपुरिया चिट्ठी

ए अरियार, त का बरियार

आजु दू दिन हो गइल आ काकी के दूनो नतियन के अल्पाहार ओठँघने से होता। जिउतिया के ओठँघन आ छ्ठि के खजूर के पावेवाला कवनो टेस्ट नइखे। आजु दू दिन बाद बड़का नतिया के अचानक याद आइल हा कि जिउतिया के कथा सुनला का बाद मइया आ माई- दूनो जानी ‘ए अरियार, त का बरियार’ बोलत रही। ऊ मइया से बतवलसि कि ओकर पूरा कविता ओकरा यादि नइखे आ ओह घरी जल्दी-जल्दी बोलला से ठीक से पता ना चलल। ऊ मइया से आग्रह कइलसि नीमन से बतावे के, तले लभेरन आ गइले। मइया हँसली आ बतवली कि ऊ कविता ना ह, ऊ कथा का बाद बरती के बोलल जरूरी होला। ऊ फेरु से सुनवली-
ए अरियार, त का बरियार,
जाके राजा रामचंद्र से कहि दीहऽ कि
फलाना के माई खर जिउतिया कइले बाड़ी,
दही भात खइले बाड़ी,
गंगा नहइले बाड़ी।
अबकी छोटका नतिया आपन सवाल दगलसि- “ई अरियार-बरियार का होला?” तब काकी बतवली कि ‘बरियार’ एगो पौधा हटे, जवन होला त दूबर-पातर बाकिर बहुत बरियार होला। ओकरा के उखारल आसान ना होला। ओकर दतुअन कइल जाला। तब बड़का बोललसि कि ओह दिन सतपुतिया के तरकारी बनावल काहें जरूरी होला? छान्ही पर फरेवाली तरकारी बाजार में से डेढ़ सइ रुपए किलो कीनि के ले अइला के का मतलब? नीमन-नीमन तरकारी एकरा से ढेर सस्ता मिलतारी सन।
काकी लभेरन पर टारि दिहली- “तू हीं ईहन लोग के बताव। नोनी के साग, मड़ुआ के आटा आदि बहुत कुछ बा, जवना प ई सवाल करबे करिहें सन। एहसे पहिलहीं बता द।”
लभेरन बतावे शुरू कइले।

सतपुतिया

‘सतपुतिया’ शब्द के उत्पत्ति संस्कृत का ‘सप्तपुत्रिका’ से मानल जाला। एकर माने होला- सात संतान वाली भा सात फल का गुच्छा के जनम देबेवाली। जइसे एक माई के कई गो बच्चा एके साथ रहेले सन, ओइसहीं एह तरकारी का बेल पर एके जगहा सात गो छोटे-छोटे फल जनमेले सन। एही शारीरिक संरचना का चलते एकर नाँव ‘सतपुतिया’ परल। कुछ लोग मानेलन कि एकरा बेल में जसहीं सात गो पतई आवेले कि एकरा पर फूल आ फल लागे शुरू हो जाला। मान्यता बाटे कि एह सब्जी के ब्रत में शामिल कइला से वंश आगे बढ़ेला।
सतपुतिया पोषण आ आयुर्वेद का दृष्टिकोण से एगो बहुत गुणकारी सब्जी हटे। एकरा में काम भर फाइबर, विटामिन ए, बी6, सी, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम आ पोटैशियम जइसन जरूरी खनिज पावल जाले सन। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगन का हिसाब से ई मधुमेह के नियंत्रित करेले। एकर ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होला। ई खइला से पाचन क्रिया में सुधार होला आ कब्ज से राहत मिलेले। ई लीवर के सुरक्षित करेले आ शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थन के बाहर निकाले में मदद करेले। ई हृदय रोग आ खून का कमी के दूर करेले। सतपुतिया के तरकारी खइला से रक्तचाप संतुलित रहेला। एकरा से शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ि जाले। आयुर्वेद का अनुसार सतपुतिया शरीर में बढ़ल पित्त आ कफ दोष के संतुलित करे खातिर एगो नीमन प्राकृतिक औषधि का रूप में काम करेले। सभसे बड़ बात त्त ई बा कि ई संतानोत्पत्ति आ प्रजनन स्वास्थ्य खातिर भी बहुत उपयोगी मानल जाले। सतपुतिया में फॉलिक एसिड (विटामिन B9) खूब मिलेला, जेकर गर्भधारण करे का प्रयास के दौरान अउर गर्भावस्था का शुरुआती दिनन में मेहरारू का शरीर के बहुत जरूरत होले। ईहे कारन बा कि जिउतिया (जीवत्पुत्रिका) ब्रत का नहा-खा आ पारन में सतपुतिया के तरकारी खाइल जरूरी मानल जाला।

अरियार-बरियार

आयुर्वेद में बरियार (बला) अउर अरियार (अतिबला) के परम बलशाली, उम्र बढ़ावे वाली आ वात दोष के शांत करेवाली दिव्य जड़ी-बूटी मानल गइल बा। जिउतिया व्रत का पारन से पहिले मेहरारू लोग बरियार के पतई चबाए भा ओकरा टहनी से दतुवन करे के परंपरा निभावेली। एकरा पीछे के वैज्ञानिक कारण ई बा कि 24 घंटा से ज्यादा समय तक निर्जला उपवास रखला का बाद शरीर में वात दोष बढ़ जाला अउर पाचन तंत्र संवेदनशील हो जाला। बला आ अतिबला वात के तुरंत शांत करेला आ शरीर के गइल ऊर्जा के भरपायी करेला।

मडुआ के रोटी

मड़ुआ (रागी) में भरपूर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम अउर आयरन पावल जाला। नहाय-खाय के दिन एकर रोटी खइला से पेट भारी रहेला अउर कड़ा उपवास के दौरान जल्दी भूख भा कमजोरी के अहसास ना होखे। पारन का दिने मड़ुआ के रोटी खइला से निर्जला व्रत का कारन देंह में भइल कमजोरी तुरंत दूर हो जाले।

नोनी के साग

नोनी के साग पोषक तत्व अउर एंटीऑक्सीडेंट से भरल होला। ई बरती लोगन के कमजोरी से बँचावेला आ देंह के ताकत बढ़ावेला। 24 घंटा से बेसी निर्जला व्रत रखला का बाद कब्ज अउर गैस के समस्या हो सकेला। नोनी के साग पचावे में बहुते आसान होला अउर पेट के ठंढा राखेला।
साँच त ई बा कि हमनी के पूर्वज जिउतिया जइसन कठिन ब्रत में नोनी साग आ मड़ुआ जइसन ‘सुपरफूड’ के जोरि के ई साबित कइले बाड़े कि हमनी के परंपरा विज्ञानसम्मत बाटे।

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