रोवे के रहलीं तले अँखिए खोदा गइल
- डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-65
आइल भोजपुरिया चिट्ठी

रोवे के रहलीं तले अँखिए खोदा गइल


आजु लभेरन भोरहीं भोरे आ गइल रहन। काकी त खुश रहबे कइली, दूनों नतियो उछड़त रहन स। आजु इस्कूल के छुट्टी रहे, बतकही आ कहानी के खूब आनंद मिली। काकी लभेरन से तनी झुझुआइए के पुछली- “बंगालो के चुनाव भइला त कतना दिन भइल, अब त ओहिजा के रूपेरेखा बदलि गइल बा। ए पारी का दुर्गापूजा में त रोडो प गोड़ धरे के जगहि ना रहल हा। मनपतिया बतावत रहल हा कि लोगन के हँसल-बतियावल देखिके अइसन लागत रहल हा, जइसे आजुए पहिलका स्वतंत्रता दिवस होखे। लागता कि विपक्ष के लोग आजु-काल्हु खलिहा बइठल बाड़न। जबे देखऽ, जंतर-मंतर भा रामलीला मैदान में बूनियो पानी में पहुँचि जातरन। इहनी के ई तनिको नइखे बुझात कि अभी हिंदू का परब-तेवहार के दिन चल रहल बा, एही में त तनी नीमन खरीददारी होला आ बएपारियो के दिन चमकेला। ई अदि-बदि के एही टइमवा प धुमगाजर मचाके सभके तबाह कइले बाड़े सन।”

अतने में काकी के छोटका नतिया पुछलसि- “मइया, रामलीला मएदान में हमेशा रामलीला होला?”
काकी कहली- “ऊ दिल्ली के रामलीला मएदान हटे। ओहिजा असली रामलीला एके बेर कुआर में होला। एकरा बाद त अब नेता लोगन के अजब-गजब लीला देखे के मिली।”
अबकी बड़का नतिया पुछलसि- “ओहिजा नाच-गाना होला? आर्केस्ट्रा अवेला कि ना?”
काकी हाथ चमकावत बोलली- ओहिजा पढ़ल-लिखल नचनिया आवेले सन आ जगहे जगह डीजे मिली, जेनिए आँखि घुमइबऽ लोग, ओनिए नाच-गान आ भाषण मिली। अपना बाप सङे कवनो छुट्टी में चलि जइहऽ लोग।”

काकी के रोख देखिके दूनो नतिया सकपका गइले सन। अब काकी फेरु अपना बात पर अइली- “ए लभेरन, हमरा ई नइखे बुझात कि बुढ़नठ-बुढ़नठ नेतन के लोग युवराज काहें कहतारन, एके बेरि रऽजे कहि दिहित लोग। हमरा ई नइखे बुझात कि जब देखऽ तब हारते रहतारे सन आ भोट चोरी भोट चोरी चिचियात रहतारे सन। इहनी के का बुझेले सन कि पबलिक पाड़ा ह?”

लभेरन कहले- “अइसन बात नइखे। एगो कहाउत कहाला कि आपन हारल आ मेहरी के मारल केकरा से कहीं। अगिला साल फेरु चुनाव बा। जइसन रहनि लउकत बिया, गती त ओइसने नु होई? इहनी के ई पता बा, एहसे पहिलहीं से हार के बाद पब्लिक का भीतर शान से जाए के बहाना खोजतारे सन।”

काकी कहली- हमनी किहाँ त कहाला कि लाजे लइका ढोंढ़ी टोवे। हरला का बाद केहूँ से नजरि मिलावल आसान ना होला आ इहनी का नजरी में त कवनो लाजे नइखे। जब देखऽ त एके राग कढ़वले बाड़न स।”

लभेरन कहले- “रउआँ ठीक पकड़ले बानी। अभी त ई हाल हो गइल बा कि का कहिके पबलिक के अपना सभा में बोलावल जाउ। एहमें दोसरा के उल्लू बनावे खातिर घरे बइठल SIR के एगो बहाना मिल गइल बा। एगो कहाउत ह नू कि रोवे के रहलीं तले अँखिए खोदा गइल। अब पाँकी में छपाछप-छपाछप करत SIR के रेकाड खूब बाजी, चुनावे भर ना ओकरा बादो।”

काकी लभेरन से गंभीर होके बोलली- “ई SIR आ भोट चोरी के तनी नीमन से हमरा के समुझाव। दूनो नतियो ई जाने खातिर उत्सुक रहन स। लभेरन कहे शुरू कइले।

“SIR माने विशेष गहन पुनरीक्षण। देश में जब-जब चुनाव भइल बा, तब-तब ई भइल बा। 2025-26 में हो रहल SIR से पहिले देश में आठ बेर SIR हो चुकल बा। एकरा में जे मरि गइल बा, भा जे बाहरो जाके भोटर कार्ड बनवा लेले बा, ओकर एक जगह के छोड़िके बाकी भोटर लिस्ट में से नाँव काटि दिहल जाला। एकरा सङहीं, जेकर उमिरि भोट देबे लाएक हो गइल बिया, ओकर नाँव जोरि दिहल जाला।”
“त एहमें गलती का बा?”- काकी पुछली। लभेरन फेरु बतावे शुरू कइले।

भारत के विपक्षी पार्टी जहँवा चुनाव हारल बिया, ओहिजा SIR प दोष मढ़तिया कि ओकरा के भोट देबेवाला लोग के नाँव काट दिहल गइल, एही से हार भइल हा। एकरा खातिर ऊ चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार के जिमवार बतावतिया आ वर्तमान सरकार पर भोट चोरी के आरोप लगावऽतिया। ऊ SIR का आड़ में वोट चोरी के मुद्दा बना के देशवासी के गुमराह करे के काम करऽतिया। ई काम त पहिलहूँ भइल बा, 25-26 से पहिले 8 बार। एकरा बिना चुनाव करावल एक तरह से धाँधलिए नु बा।

सच्चाई ई बा कि SIR पूरा भइला आ वोटर लिस्ट सार्वजनिक कइला का बाद ओहमें घटवावे-बढ़वावे खातिर त पहिले मान्यता प्राप्त राजनीतिक दले के प्रारूप दीहल जाला। अइसना में राजनीतिक दल के ई जिमवारी बनत बा कि ऊ एह प्रक्रिया में बढ़-चढ़ के हिस्सा लेउ आ जो कवनो सही वोटर छूट गइल बा त ओकर नाँव जोड़वावे के काम करो। बाकिर, तब त कवनो दावा पेसे ना कइल लोग आ अब जनता का बीचे जाके नाच-गान कइके आरोप लगावता लोग।

काकी कहली- माने चुनाव आयोग जइसन संवैधानिक संस्था के बदनाम क के चुनावी प्रक्रिया पर से लोग के विश्वास खतम कइल चाहता लोग। भरम में बा लोग, पबलिक सभके चीन्हतिया।

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