लइका के छुअबि ना जवान हमार भाई
–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल #भोजपुरिया-चिट्ठी #भोजपुरी #जाड़ #रजाई #डॉ.रामरक्षा-मिश्र-विमल...
Read More–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल #भोजपुरिया-चिट्ठी #भोजपुरी #जाड़ #रजाई #डॉ.रामरक्षा-मिश्र-विमल...
Read More–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल #भोजपुरिया-चिट्ठी #भोजपुरी #नया-साल #सऽमत #डॉ.रामरक्षा-मिश्र-विमल...
Read More– डा॰ रामरक्षा मिश्र विमल होली, होरी भा फगुआ जवन कहीं, हटे एकही. साँच पूछीं त हम एह अवसर पर रंग खेलला आ हुड़दंगई के पक्षपाती हईं. जइसे बियाह शादी का अवसर पर मेहरारुन के गारी गावल हमरा बिल्कुल वैज्ञानिक लागेला, ओसहीं फगुआ के...
Read MorePosted by Editor | अगस्त 6, 2012 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
डा॰ रामरक्षा मिश्र विमल के हालही में प्रकाशित काव्य संग्रह “फगुआ के पहरा” में २७ गो गीत, २२ गो गजल आ ६ गो कविता बाड़ी सँ. डा॰ विमल हिन्दी आ भोजपुरी के साहित्यकार हईं आ मूल रूप से गीतकार हईं. अँजोरिया के सौभाग्य बा कि...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..