Tag: बतकुच्चन

भाखा आ भाखल (बतकुच्चन – १३१)

भाषा के केहू भासा बोलेला त केहू भाखा. ष के उच्चारण आम बोलचाल में ख हो जाला. लिखे में भोजपुरी मे त भासा के इस्तेमाल खूबे होला. खैर आजु हम भासा का फेर में नइखीं. हम त आज भाखा आ कुभाखा का फेर में बानी. ई भाखा भाषा वाली भाखा ना होके...

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शहजादा आ शोहदा (बतकुच्चन – १३०)

राजनीति में आवत गिरावट के कवनो पेंदी नइखे लउकत. चारा चबावे वाला के उमेद रहुवे कि ओकरा साथे भाईचारा निभावल जाई बाकिर ओकरा के बेचारा बना दिहल गइल. जे जब तब संकट का घरी में उनुकर साथ दिहलसि आ देत गइल ओकरा पर जब आफत आइल त तनाइलो...

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टेंटीहा, लरछूत, आ पराछूत (बतकुच्चन – १२९)

आजु बतकुच्चन करे बइठनी त धेयान में टेंटीहा, लरछूत, आ पराछूत जइसन शब्द घूमे लागल. कारण कि आजु के माहौल में जेने देखी तेनिए टेंटीहा, लरछूत आ पराछूत लउक जइहें. केहूं इनका के टेंटीहा कही त केहू हुनका के. अब एहसे पहिले कि टेंटीहा,...

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बबुअवा से त बबुनिए नीमन (बतकुच्चन – १२८)

बबुअवा से त बबुनिए नीमन रहीत. बाकिर का कइल जाव, उ आन घर के हो गइल आ दमदा नाम कमा लिहले बा. एहसे अब बबुनिया के आगे करे में डर लागत बा. बाकिर एह मुद्दा पर आगे कुछ कहि के फसल ना चाहब आ लवटब पिछला दिन का बाढ़ का तरफ. आए दिन खबर मिलत...

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शासन चलावल, बच्चा पालल आ दूध उबालल बिना खड़ा भइले ना हो पावे ( बतकुच्चन – १२७)

गंगा, तिरंगा, नवरंगा, बहुरंगा, एकरंगा, लफंगा, भिखमंगा, लंगा, आ दंगा. तिरंगा आ बहुरंगा आबादी वाला अपना देश में गंगा के महत्व बहुते बा. बाकिर गंगा के खासियते में एगो अइसन गुन लुकाइल बा जवना के केहू बढ़ियो कह सकेला त केहू खराबो....

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🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

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