ई अतते कबले (बतकुच्चन – १२६)
ई अतते कबले, जब ले चले तबले. पिछलका पख में संसद से लिहले सड़क ले कुछ अइसने नजारा देखे के मिलल जवना से मन में ई सवाल उठ गइल कि ई अतते कब ले? आ संगही जबाबो मिल गइल कि जब ले चले तबले. कवनो अति तबहिए ले चल पावेला जब ले ओकरा के भुगते...
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