Tag: बतकुच्चन

बतकुच्चन – १०९

हुकहुकी चलत बा. केकर? अब का कहल जाव कि केकर. ओने सरबजीत के त एने सरकार के. कब साँस रुक जाई केहु नइखे जानत. आ साँच कहीं त साँस त कब के रुक गइल बा. बस वेंटिलेटर के सहारे साँस चलत बा. केहु के वेंटिलेटर मशीन से, त केहु के बाहर से...

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बतकुच्चन – १०८

पान सड़ल काहे, घोड़ा अड़ल काहे, रोटी जरल काहे, लईका बिगड़ल काहे ? एह चारो सवाल के एके जवाब कि, फेरल ना गइल. पान के पत्ता के बारबार पलटत रहे के पड़ेला, ना पलटब त सड़े लागी. घोड़ा के बीच बीच में दउड़ावत रहे के पड़ेला, आदत छूट जाई त बीचे...

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बतकुच्चन – १०७

हँसुआ के बिआह में खुरपी के गीत, हिंदी का पेपर में गणित के सवाल. हो सकेला कि आजु के बतकुच्चन रउरो कुछ अइसने लागे. पिछला दिने तीन जगहा बम फटला के खबर आइल. अमेरिका के बोस्टन, पाकिस्तान के पेशावर आ भारत के बेंगलुरु से. एह तीनो में...

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बतकुच्चन १०६

आजु पता ना काहे मन करत बा कि बिर्हनी के छत्ता खरकोंच दी. काहे कि एने कुछ दिन से मधुमाखी के छत्ता चरचा में आ गइल बा. अब मधुमाखियन के भरभरा के निकल पड़े खातिर अतने बहुत बा. बिना कुछ अउर बोललहू लोग भँभोरे निकल पड़ी बाकिर आजु त कहला...

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बतकुच्चन १०५

“अंगुरी में डँसले बिया नगिनिया ए ननदी सईंया के जगा द, रसे रसे उठेला लहरिया ए ननदी, सईंया के...

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अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

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