बतकुच्चन – ८४
गुन आ ग्यान, गुनी आ ग्यानी. के बड़ छोट कहत अपराधा. बाकिर बिना गुन के ग्यान आ बिना ग्यान के गुन ढेर कामे ना आ पावे. गुन आ गुण एक होइओ के एक ना होखे. गुण दोष वाला गुण आ हुनर वाला गुन. अब एह गुन के केहु के गुण मानल जा सकेला बाकिर हर...
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