गउँवा गउँईं त गईंया भेंटइले (बतकुच्चन – 191)
भोजपुरी के खासियत ह कि एकरा में नया शब्द गढ़े के अपार बेंवत मौजूद बा आ इहे एकर कमजोरियो साबित हो जाले कई बेर. हिन्दी के विद्वान लोग जब भोजपुरी लिखे चलेला त अकसरहाँ ओह लोग के संस्कृतनिष्ठ हिन्दी आ व्याकरण बोध हावी रहेला आ फरक...
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