बतकुच्चन २९
आजु जब बतकुच्चन करे बइठनी त मन सरोकार-सरकार-सरकँवासी से सरकत गझिन आ फाँफर पर आ के अटक गइल. सरोकार-सरकार-सरकँवासी पर पहिले बतिया चुकल बानी आ ओकरा के दोहरवला के कवनो जरुरतो नइखे. बाकिर गझिन आ फाँफर के चरचा समय का हिसाबो से फिट...
Read Moreआजु जब बतकुच्चन करे बइठनी त मन सरोकार-सरकार-सरकँवासी से सरकत गझिन आ फाँफर पर आ के अटक गइल. सरोकार-सरकार-सरकँवासी पर पहिले बतिया चुकल बानी आ ओकरा के दोहरवला के कवनो जरुरतो नइखे. बाकिर गझिन आ फाँफर के चरचा समय का हिसाबो से फिट...
Read Moreप्रकृति के एगो नियम विज्ञान में पढ़ावल जाला कि ऊ गँवे गँवे सब कुछ के समतल सपाट करे में लागल रहेले, चाहे ऊ पहाड़ होखे भा कवनो झील पोखरा गड़हा. अलग बाति बा कि पता ना का होई जब सब कुछ समतल हो चुकल रही. शायद तब धरती पर पानी के प्रलय आ...
Read Moreबतबनवा के बतकुच्चन कइल दोसर बाति ह आ घुरचियाह के घुरपेंच बतियावल दोसर. बतकुच्चन करे वाला बाते बात में सामने वाला के कुछ बता देबे के कोशिश करेला. जबकि घुरचियाह आदमी प्रपंची होला आ ओकर घुरपेंच बतियवला के पीछे ओकरा नियत के खोट होला...
Read Moreमानत बानी कि बरसात के मौसम बा. कहीं कम त कहीं बेसी बरखा पड़त बा. बाकिर एकर मतलब ई त ना भइल कि सड़कि के कादो पाँकि हँचाड़ खोभाड़ि के चरचा हम सबेरे सबेरे शुरु कर दीं. आखिर हर बाति के एगो आपन समय होला. लेकिन देखत बानी कि बतकुच्चन करे...
Read Moreआजु जब हम ई लिख रहल बानी त मन बहुते अँउजाइल बा. तीन दिन से कुछ काम नइखे हो पावत. सगरी धेयान ओहिजा लागल बा जहवाँ दू गो पक्ष एह तरह से लड़त बा कि “बतिया पंचे के रही बाकिर खूंटवा रहिये पे रही”. केहू दोसरा के सुनल नइखे...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..