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भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" के भूमिका

आदर्श युवक के सम्मोहक प्रेम के सूत्र में बंधल सामाजिक ताना बाना ‘जुगेसर’ उपन्यास एगो अइसन व्यापक फलक वाला आधुनिक उपन्यास ह जवना में गांव अउर शहर दूनों के सामाजिक परिस्थिति अउर चुनौती के वस्तुपरक ढंग से बहुत व्यापक...

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स से हुंसियार रहे नारी जाति

– जयंती पांडेय अपना देश में मेहरारू जात हमेशा खतरा में रहेले. पहिले बंगाल में कवनो खतरा ना रहे पर अब त इहों खतरा बढ़ि गइल बा. अपना देस के मेहररूअन के समय-समय पर अनेकानेक दुश्मन से सामना होत रहेला आउर ओहमें सबसे पहिला नाम...

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चइता

– डॉ.कमल किशोर सिंह चिकित्सक के चइता रामा कहेलें कन्हैया सुनहो प्यारी राधिका हो रामा हमरा के – मक्खन अब ना खियाव हो रामा हमरा के —— रामा खाई के मक्खनवा बढ़वनी वजनवा हो रामा , रक्त-चाप – रक्त- चाप...

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अभागा

– इं॰ राजेश्वर सिंह जब केहू के कवनो मसला समझ में ना आवेला त अपने से अधिक ज्ञानी मनई से शंका समाधान करे चलि जाला अउर समस्या के बारे में पूछि-ताछि के जानकारी कइ लेला. लक्ष्मण जइसन मनइ के अभागा लोगन के पहिचान कइले में शंका...

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नीमिया रे करूवाइन

– डा॰ जनार्दन राय नीनि आइल निमन हऽ. जेकरा आँखि से इहाँ का हटि जाइला ओकर खाइल-पियल, उठल-बइठल, चलल-फिरल, मउज-मस्ती, हँसी-मजाक कुल्हि बिला जाला. अइसन जनाला कि किछु हेरा गइल बा, ओके खोजे में अदिमी रात-दिन एके कइले रहेला. निकहा...

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