फरिश्ता बचावे ला लड़बे करी

– जलज कुमार अनुपम


फरिश्ता बचावे ला लड़बे करी.
मान काठी जवानी के ढलबे करी.
भितरी दिल बाटे, दिल तs मचलबे करी.
दमकी साधि के आखिर ई कब ले सही,
जवन दबल बा तवन निकलबे करी.

कब ले केहु उड़ी आखिर आकास में,
पेट कुहकी, लात जमीन पर धरबे करी.
बिछुवा डंक मारते रही एकर उ करम ह,
खाके भी चोट, फरिश्ता बचावे ला लड़बे करी.


आवास : बेतिया, पश्चिमी चंपारण, बिहार – 845438
संपर्क सूत्र : +91 – 9971072032
प्रकाशित रचनाये : बाल कथा (2009)
अप्रकाशित रचना : आकांक्षा (उपन्यास ),बोल मेरे मन (कविता संग्रह),शादी भारत में (व्यंग)

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