– टीम अंजोरिया
#भोजपुरी #तृणमूल #डर-भय #चुनाव #अभिषेक-बनर्जी
भूताह जब भूत से डेराए लागे
when apparition fears a ghost

आजु के लेख पर आगा बढ़ीं एहसे पहिले जरुरी बा कि एकरा मथैला के चरचा कर लिहल जाव। भूताह भूत त ना होखे बाकिर भूत होखे के आभास देला। आ एह आभास के हिन्दी में प्रेत कहल जाला। प्रेत भूत ना होखे बस ओकर आभास देला। बाकिर प्रेत भा परेत का जगहा भूताह शब्द जस के तस इस्तेमाल ना कइल जा सके। भूत के दू गो अर्थ होला – एगो माने अतीत जइसे कि भूत-काल आ दोसर होला पृथ्वी पर विचरत मृत व्यक्ति के आत्मा। सवाल पूछल जा सकेला कि मृत व्यक्तिए काहे. मृत पशु-पक्षी के काहे ना? सवाल जायज बा बाकिर शायद, हम ‘शायदे’ कह सकिलें काहें कि हमरा सचहूं सच मालूम नइखे, ई एह ले कि धरती के जीवन में मानवे के बु्द्धुुिवाला मानल गइल। आ जेकरा बुद्धि होखी उहे तय कर सकेला कि ऊ एह जगत के छोड़ के ओह जगत में जाव भा हो सकेला कि ऊपर वाला तय करत होखे कि अबहीं ऊपर जगहा नइखे आ तू धरतिए पर विचरऽ जबले तोहार नाम वेटिंग लिस्ट में बा।
अतना भूमिका का बाद असल मुद्दा पर आइल जरुरी बा। सभे जानत बा कि दू हफ्ता का भितरे पश्चिम बंगाल के चुनाव होखे जा रहल बा. अबहीं तक के अनुभव इहे बतावेला कि लोग ममत से डेराला। पिछला पंचायत चुनाव आ ओकरा बाद के विधानसभा चुनाव का दौरान आ ओकरा बाद जवन हालात बनल आ ममता विरोधियन के जवना तरह से खाल ऊखाड़ल ई केहू से भुलइले ना भुलाई। आ सभे एह बात के मनबे करी कि जबले ई डर पश्चिम बंगाल के मतदाता में मौजूद रही तबले ममता सरकार के उखाड़ल संभव नइखे। बाकिर अबकी का चुनाव में हालात बदलत नजर आवत बा। अब भूताह – जेकरा भूत हो जाए के अनेसा बा – भूत से डेराए लागे तब ई अनुमान लगावल गलत ना होखी कि भूताह प्रेत बने जा रहल बा। भूत के आभास देबे वाला प्रेत होला आ प्रेत के आभास देबे वाला के भूताह कहल जा सकेला।
आजु के लेख लिखे के प्रेरणा मिलल ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी के एक्सप्रेशन (पुरनका ट्वीटर) से। एह एक्सप्रेशन में अभिषेक जवन व्यक्त कइले बाड़न तवना के जस का तस नीचे दे रहल बानी। बाकिर अंगरेजी में लिखल उनुका एक्सप्रेशन के भोजपुरी मे बतावल जरुरी बा. अब चूंकि हर एक्सप्रेशन का पाछा कवनो ना कवनो खबर भा विचार जरुरे होला से पहिले ओह खबर के बात –
काल्हु यानि के 13 अप्रैल 2026 का दिेने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव अभियान के योजना बनावे वाला आई-पैक ( I-PAC) के सह-संस्थापक विनेश चन्देल के प्रवर्तन निदेशालय – ईडी- गिरफ्तार कर लिहलसि। उनुका पर आरोप बा कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के खदानन से कोयला के कालाबाजारी से मिलल धन उनुका संस्था के दिहल गइल. पिछला दिने जब विनेश चन्देल का कोलकाता कार्यालय पर छापा पड़ल रहुवे तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनहीं जा के ईडी के अधिकारियन से कागजात आ सबूत छीन ले आइल रही।
अब एह खबर अइला का बाद तृणमूल कांग्रेस के – कांंग्रेस वाला राहुल भा राजद वाला तेजस्वी भा बसपा वाला आकाश बबुआ – अभिषेक बनर्जी लिखले बाड़न कि –
बंगाल चुनाव का ठीक पहिल विनेश चन्देल के गिरफ्तारी बस डेरावते नइखे बराबरी से मुकाबला करे के मौको के धराशाई करत बा।
आजु जब पश्चिमबंगाल एगो निष्पक्ष आ भयमुक्त चुनाव का तरफ बढ़ रहल बा एह तरह के कार्रवाई एगो खतरनाक संदेश दे रहल बावे कि अगर तू विपक्ष का साथे बाड़ऽ त अगिला नंबर तोहार हो सकेला। ई लोकतंत्र ना होके डरावना बा।
आ जवन बात एह खबर के पचावे में दिक्कत देत बा ऊ ई कि ई दोगला मानक बावे। अगर भठियरपन के आरोप झेलत कवनो आदमी पाला बदल लेव त ओकरा के पूरा सुरक्षा मिल जात बा। आम मनई – (आदमी एह से ना लिखनी कि एह बात के केजरीवाल के आआपा से कवनो नाता नइखे) एह बात के निकहा देख रहल बा।
जब लोकतंत्र के सुरक्षा ला बनावल संस्थान दबाव डाले के काम करे लागे ओहनी पर से भरोसा हटे लागेला। एक तरफ से चुनाव आयोग आ दोसरा तरफ से ईडी, एनआईए, सीबीआई दखल देत बाड़ी सँ एह संवेदनशील मौका पर। ई निष्पक्षता के माहौल ना बना के डर के माहौल बना रहल बा।
भारत (ऊ इण्डिया लिखले बाड़न ) हमेशा से अपना लोकतंत्र – शोर भरल, बेतरतीब बाकिर निष्पक्ष – पर गर्व करत आइल बावे। बाकिर आजु बहुते लोग ई सवाल करे लागल बा कि का सचहूं हमनी का अबहियों उहे देश बानी?
ई एगो गिरफ्तारी से बड़हन मामिला बा। ई एह बारे में बा कि का हमहन के संस्थान निष्पक्ष बाड़ी सँ आ का हर नागरिक, ओकर राजनीतिक विचार जवन होखा- बिना डर के एहमें शामिल हो सकेला.
काहें कि एक बेर जब डर स्वतंत्रता के जगहा ले लेव त लोकतंत्र बस एगो शब्द बनि के रहि जाला।
अमित शाह आ भाजपा के शक्ति संरचना से हम इहे कह सकिलें कि – बंगाल में चार मई के भा पाॅच मई के रहि के देखऽ। अपना संगे ज्ञानेश कुमार आ सगरी एजेन्सियन के लेले आवऽ। बंगाल के डरावल ना जा सके, कवनो तरह से चुप ना करावल जा सके। ई ऊ भूमि हवे जवन हर दबाव के सामना प्रतिरोध से करेला आ ई देखा दी कि एकर मतलब का बा!
अंगरेजी लेख के भोजपुरी उल्था करे में हो सकेला कि कुछ कमी रहि गइल होखे एहसे अभिषेक बनर्जी के एक्सप्रेशने दे दे रहल बानी। बाकिर साँच कहीं त ई डर नीमन लागत बा।
The arrest of Vinesh Chandel, co-founder of I-PAC, barely 10 days before the Bengal elections, is not just alarming- It shakes the very idea of a level playing field.
At a time when WB should be moving toward free and fair elections, this kind of action sends a chilling message:…
— Abhishek Banerjee (@abhishekaitc) April 13, 2026

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