शतरंज के खेल
भउजी हो ! आईं बबुआ, हम रउरे इन्तजार में रहली हँ. काहे भउजी ? तोहरा कइसे मालूम हो गइल कि हम आवे वाला बानी ? रउरा का सोचीलें हम हरदम चुहानिये में रहीलें ? देश दुनिया के खबर हमरो लगे रहेला. पूछीं का जाने चाहत बानी ? भउजी तू त आजु...
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