साल: 2010

डर-भय

– डॉ. कमल किशोर सिंह डर बहुरुपिया बनि के आवे, हरदम दिल दुआरी पे. कइसे जान बचाईं आपन, कतना चलीं होशियारी से? चिकन चेहरा से हम डरीं की बढ़ल केश मूँछ दाढ़ी से? भय भगवान से केकरा नइखे, काहे ज्यादा भय पुजारी से ? पढ़ल लिखल लोगन...

Read More

बतकुच्चन – ४

ओह दिन एगो टीवी चैनल पर संगीत के रियलिटी शो देखत रहीं. एगो गायिका गीत गावत रही, “सईंया के थूरल देहिया….” मतलब उनकर रहे “सईंया से थुराइल देहि” के आ गावत रहली “सईंया के थूरल देहिया..”. कुछ...

Read More

त ओह समय मुँह काहे बंद रहे ?

सिर्फ एक सवाल. आज ले इहाँके (कल्पना जी के) भोजपुरी बहुत कुछ दिहलसि लेकिन इहाँके भोजपुरी खातिर का कइले बानी, जे लिखात बा की “संगीत के दुनिया के कुछ लोग के लागल कि दोसरा भाषा, दोसरा प्रान्त से आ के एगो गायिका भोजपुरी के...

Read More

चलीं फेर से आसान कर दिहल जाव कमेंट दिहल

कुछ दिन से देखत बानी कि अँजोरिया के पाठक पाठिका लोग के टिप्पणी नइखे आवत. हालांकि केहू के टिप्पणी पर रोक नइखे लगावल गइल. बस कुछ अनेरिया लोगन के अनेरे के कमेंट डिलीट कइला से परेशान होके सोचनी कि जरुरी कर दीं कि लोग कमेंट लिखे से...

Read More

टटका खबर

हाय रे ओठ लाली ! छात्र संघ चुनाव करावे खातिर राहुल गाँधी सिब्बल से भेंट कइले दीपावली का मौका पर दूध के सामान में मिलावट रोके खातिर जहें तहें छापा नीतीश के चोर आ बेईमान कहली राबड़ी देवी यूपी के पंचायत चुनाव मतगणना के दुसरका...

Read More

Recent Posts



अंजोरिया पर खोजीं -

आपन टिप्पणी, लेख, कहानी, कविता, विचार भेजे खातिर -

anjoria@rediffmail.com

अगर राउर रचना पहिला बेर आ रहल बा त आपन एगो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ में जरूर डाल दीं.

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..