डर-भय
– डॉ. कमल किशोर सिंह डर बहुरुपिया बनि के आवे, हरदम दिल दुआरी पे. कइसे जान बचाईं आपन, कतना चलीं होशियारी से? चिकन चेहरा से हम डरीं की बढ़ल केश मूँछ दाढ़ी से? भय भगवान से केकरा नइखे, काहे ज्यादा भय पुजारी से ? पढ़ल लिखल लोगन...
Read Moreओह दिन एगो टीवी चैनल पर संगीत के रियलिटी शो देखत रहीं. एगो गायिका गीत गावत रही, “सईंया के थूरल देहिया….” मतलब उनकर रहे “सईंया से थुराइल देहि” के आ गावत रहली “सईंया के थूरल देहिया..”. कुछ...
Read Moreसिर्फ एक सवाल. आज ले इहाँके (कल्पना जी के) भोजपुरी बहुत कुछ दिहलसि लेकिन इहाँके भोजपुरी खातिर का कइले बानी, जे लिखात बा की “संगीत के दुनिया के कुछ लोग के लागल कि दोसरा भाषा, दोसरा प्रान्त से आ के एगो गायिका भोजपुरी के...
Read Moreकुछ दिन से देखत बानी कि अँजोरिया के पाठक पाठिका लोग के टिप्पणी नइखे आवत. हालांकि केहू के टिप्पणी पर रोक नइखे लगावल गइल. बस कुछ अनेरिया लोगन के अनेरे के कमेंट डिलीट कइला से परेशान होके सोचनी कि जरुरी कर दीं कि लोग कमेंट लिखे से...
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