साल: 2014

अर्थ, अनर्थ आ कुअर्थ के चरचा (बतकुच्चन – 180)

अर्थ का बिना सबकुछ व्यर्थ होला. चाहे ऊ कवनो बाति होखो भा आदमी. कुछ दिन पहिले हम कहले रहीं अर्थ, अनर्थ, कुअर्थ वगैरह के चरचा के बात. फेर बीच में कुछ दोसर बाति निकलत गइल बाकिर ऊ बाति बिसरल ना रहुवे से आजु ओहिजे से शुरू करत बानी....

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नवासी का फेर में आवासी आ निवासी के चरचा (बतकुच्चन – 179)

पिछला 2 नवंबर का दिने मारीशस आप्रवासियन के अइला के 180वां सालगिरह मनवलसि. एही दिने भारत से गइल गिरमिटिहा मजदूर पहिला बेर मारीशस का किनार पर पानी के जहाज से आ के उतरल रहले. आ हमरा बतकुच्चन के मसाला मिल गइल. आप्रवासी शब्द पढ़ के...

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कालाधन बैंक में लुकाइल बा त कवन आश्चर्य

– जयंती पांडेय किताबन में, मय अखबारन में पढ़ले बानी कि संसद के एक दिन के कार्रवाई में कई लाख रुपया खर्चा होला. लेकिन बाबा तूं बतावऽ कि कालाधन आउर कई गो मामूली बात खातिर सांसद लोग संसद के कार्यवाही ना चले देला, आ कामकाज ठप...

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खबर भोजपुरी में (शनिचर, 6 दिसंबर 2014)

(शुक, 5 दिसंबर के खबर) जम्‍मू कश्‍मीर चुनाव में जनता के बड़हन भागीदारी देखला का बाद लोग के हदसावे खातिर शुक का दिने आतंकवादी कई जगहा ताबड़तोड़ हमला कइलें जवना में 11 गो सुरक्षाकर्मी आ 8 आतंकवादियन समेत 21 लोग मरा गइल. उत्‍तरी...

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भौकाली

– अशोक द्विवेदी उहो बजावे ले एकतारा ! तुलसी, सूर प’ मूड़ी झाँटसु ले कबीर के नाँव, सरापसु भदभाव के टाफी चाभत कबिता कहनी लीखसु नारा ! उहो बजावे ले एकतारा ! पढ़सु फारसी, बेचस हिन्दी उर्दू में अंगरेजी बिन्दी अनचितले जब...

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