चबा ना सकीं त चभुलाई काहे ना (बतकुच्चन – १५३)
रंग बरसे भींजे चूनर वाली वाला गाना के एगो लाइन आजु बरबस याद आवत बा कि चाभे गोरी के यार बलम तरसे रंग बरसे. आ साथही याद आवत बा लइकाईं में सुनल एगो कहानी के बाल नायक के बोल कि सात गाय के सात चभोका, चौदह सेर घीव खाँउ रे, कहाँ बारे...
Read More

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..