साल: 2014

नारी

– अभयकृष्ण त्रिपाठी पहचान के जरुरत नइखे हम नारी बानी मानी न मानी हर केहु पर भारी बानी || लुट रहल बा अस्मत चारो ओरि, जानत बानी, नारी भइल नारी के दुसमन इहो मानत बानी, कोख मारीं आ सर तान के केतनो चलीं रउआ जग के जनावर से परिचय...

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नियर आ नियरा के चरचा (बतकुच्चन १५१)

बड़ बूढ़ लोग गलत नइखे कहि गइल कि नियरा के बारात देरी से लागेला. काहे कि अदबद के कुछ ना कुछ अइसन हो जाला कि सगरी इंतजाम आ सोचावट धइले रहि जाला आ काम बिगड़े का कगार प आ जाले. खास क के तब जब पीर बवर्ची भिश्ती खर सभके काम एके आदमी के...

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पत से पतुरिया के चरचा (बतकुच्चन १५०)

बसंत ऋतु से पहिले पतझर आवेला. पुरान पतई झर जाली सँ आ नया नया पतई निकले लागेला त कहल जाला कि बसंत आ गइल. बाकिर आजु ऋतु का बारे में ना बतिया के हमरा पत से पतुरिया के चरचा ले अपना के बन्हले राखे के बा. काहे कि पिछला दू बेर से पत से...

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गांवो में फइलल किरकिटिया बेमारी

– जयंती पांडेय ओह दिन गांव के बूढ़ नथुनी बाबा के देहांत हो गइल. इंडिया आ पाकिस्तान के क्रिकेट मैच रहे ओह दिन. ऊ का दो बीस-बीसा (20-20) कहाला, उहे मैचवा रहे. मुअले सांझ के. आ गांव के नौजवान दल गायब. खाली बूढ़ लोग ओहिजा आइल....

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रामायन शैली के असाधारण ब्यास गायत्री ठाकुर अब नइखन

भोजपुरी संगीत के एगो बहुत बड़ पुरोधा चलि गइल, बिसवास नइखे होत बाकिर ई साँच बा. रामायन शैली के अपना समय के सबसे बड़ आ स्थापित गायक ब्यास गायत्री ठाकुर अब नइखन. ठाकुरजी खाली गायके ना रहीं बलुक आसु गीतकारो रहीं. रामायन,महाभारत आ...

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