हद, हदस, हदसल, हदसावल, हदसी, हदीस, हादसा (बतकुच्चन – 205)
हद, हदस, हदसल, हदसावल, हदसी, हदीस, हादसा. मामिला बेहद गंभीर बा आ बतकुच्चन करे में मन हदसल बा कि पता ना कब केने से इशरत के अब्बा भा वानी के फुआ सामने आ जइहें घेर बान्ह करे खाति. से हम अपना हद में रहे के भरपूर कोशिश करब. आ कुछ कहे...
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