घूँघट आउर इज्जत
जयशंकर प्रसाद द्विवेदी बीच बाजार में उ जब घूँघट उठवनी केतनन के आह निकलल कुछ लोग नतमस्तक भईल केहू केहू खुस भईल बाकि कुछ के आवाज बिला गईल आँख पथराइल दिनही रात के भान पानी पडल कई घइला काँप गइल रोंआ रोंआ थरहरी हिलल...
Read Moreजयशंकर प्रसाद द्विवेदी बीच बाजार में उ जब घूँघट उठवनी केतनन के आह निकलल कुछ लोग नतमस्तक भईल केहू केहू खुस भईल बाकि कुछ के आवाज बिला गईल आँख पथराइल दिनही रात के भान पानी पडल कई घइला काँप गइल रोंआ रोंआ थरहरी हिलल...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 27, 2016 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
एकलव्य “एकलव्य” डॉ. गोरखनाथ ‘मस्ताना’ के एगो प्रबंध काव्य हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2012 में खुराना पब्लिशिंग हाउस, 94, मानक बिहार, दिल्ली-110092 से भइल बा. एकर कीमत 150 रुपिया बाटे. नौ सर्ग...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 26, 2016 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
तीन डेगे त्रिलोक “तीन डेगे त्रिलोक” गंगा प्रसाद ‘अरुण’ के भोजपुरी हाइकु संग्रह हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2013 में सिंह्भूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद्, कृष्णा भवन, विवेक नगर,...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 25, 2016 | शेयर-व्यापार |
लुकावल चोरावल धन के एलान क के साफ़ सुथरा बन जाए के मौका देबे वाली अघोषित आय घोषणा योजना के आखिरी...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 25, 2016 | पुस्तक चर्चा |
जिनिगी पहाड़ हो गईल “जिनिगी पहाड़ हो गईल” डॉ. गोरखनाथ ‘मस्ताना’ के भोजपुरी कविता संग्रह हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2008 में इंद्रप्रस्थ भोजपुरी परिषद्,...
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