भवे भाव से पतोह चाव से : बाति के बतंगड़ – 11
– ओ. पी. सिंह हँ हँ, खिसियइला के जरूरत नइखे. ई एगो खास रणनीति का तहत लिखाइल बा. एह घरी सभे...
Read More– ओ. पी. सिंह हँ हँ, खिसियइला के जरूरत नइखे. ई एगो खास रणनीति का तहत लिखाइल बा. एह घरी सभे...
Read More– ओ. पी. सिंह पाकिस्तान के आदत से तंग आ के पिछला हफ्ता भारत आपन “रणनीतिक संयम”...
Read Moreडॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी चले दीं, प्रयोग बहे दीं धार काल्हु “ये दिल माँगे मोर” पर बहस होत रहे. हम कहलीं कि भाई ‘मोर’ का जगहा ‘और’ कहलो पर त कुछ बिगड़ी ना. फेर काहें एकर ओकालत करतारे लोग. हर भाषा में लिखे-पढ़ेवाला...
Read Moreआज दिनांक 05/12/2016 के जयप्रकाश विश्वविद्यालय में स्नातकोतर भोजपुरी के पढ़ाई बंद करे के बिरोध में आ पढ़ाई जारी राखे के समर्थन में एगो शिष्ट मंडल विश्वविधालय के कुलपति लोकेश चंन्द्र सिन्हा के ज्ञापन सौपलस हs आ कुलसचिव अध्यक्ष...
Read More(भोजपुरी कहानी) – सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’ राति अबहिन दुइयो घरी नाहीं बीतल होई बाकिर बरखा आ अन्हरिया क मारे अधराति के लखां सन्नाटा पसरि गइल रहे चारू ओर. अषाढ के बादर पूरा दल बल के साथे आ के डटि गईल रहे… आ...
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