स्व. सत्तन के भोजपुरी कविता संग्रह “का हो ! कइसे” के विमोचन
शबद सहारे राखिये, शबद के हाथ न पाँव. एक शबद औषधि बने, एक शबद करे घाव. दीनदयाल विश्वविद्यालय गोरखपुर के हिन्दी विभागाध्यक्ष रहल प्रो. रामदेव शुक्ल कबीरदास के लिखल एह दोहा के दोहरावत कहलन कि स्व. सत्यनारायण मिश्र सत्तन कमे लिखलन...
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