अइसे ही जब कोख मराई, रंडुहा रहि जइहें कई भाई
– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती प्रकृति क व्यवस्था में जीवन के गाड़ी खातिर दु पहिया जरूरी बतावल गइल. समाज के लोग संतति बढ़वला में सावधानी ना बरती त सामाजिक संरचना गड़बड़ा जाई. जेतने लईका ओतने लईकी रही त सामाजिक ताना-बाना बनल...
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