Category: भाषा

जनतब, अनचिन्हार आ परिचिताह (बतकुच्चन – 184)

जनतब, अनचिन्हार आ परिचिताह. तीनो के तीनो जान-पहचान से जुड़ल शब्द आ आजु के बतकुच्चन एकनिए पर. जनतब के जगहा हिन्दी में जंतव्य ना होखे आ हिन्दी के गंतव्य का जगहा भोजपुरी में गनतब ना भेंटाव. परिचित त हिन्दीओ में भेंटा जाई बाकिर...

Read More

कवन खाना खाइल ना जाव? (बतकुच्चन – 183)

पिछला बेर दहल, दहलल, आ दलकल के चरचा पर बात रोकले रहीं आजु ओहिजे से आगा बढ़ल चाहब. बाकिर बचपन के याद आवत बा जब सियालदह लोकल में एगो किताब बेचे वाला बुझउवल बुझा बुझा के आपन किताब बेचत रहे. पूछे कि बताईं कि कवन कवन खाना खाइल ना...

Read More

भोजपुरी लिखे पढ़े के कठिनाई आ काट

– डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’, ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं...

Read More

14 गो आसान तरीका भोजपुरी मुआवे के

भोजपुरी में बतियाईं मत आ जे बतियावे ओकरा के गँवार बताईं. बचवन के भोजपुरी में बतियावे मत दीं. अंगरेजी में गिटिर पिटिर करीहें स त ढेर आगा जइहें सँ. भोजपुरी के कवनो किताब, पत्रिका ना त खरीदीं ना पढ़े के कोशिश करीं. काहे कि भोजपुरी...

Read More

पाती के चौहत्तरवाँ अंक का बहाने कुछ मन क बात

– अशोक द्विवेदी पत्रिका के 74वाँ अंक रउवा सभ के सामने परोसत हम अपना स्रम के बड़भागी मान रहल बानी जे 1979 से जूझत-जागत, ठोंकत-ठेठावत हमनी का पैंतीसवाँ बरिस में चलि अइली जा। एह यात्रा में, सँग-सँग कुछ डेग चले वाला हर...

Read More

Recent Posts

🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

🌐 ChatGPT से खुद बातचीत करीं – आ देखीं ई कइसे रउरो रचना में मदद कर सकेला।