टंच माल के चरचा (बतकुच्चन – १२२)
पिछला दिने टंच माल के बात बड़हन चरचा में रहल. जेकरा के टंच माल कहल गइल रहे उनका ई आपन बड़ाई लागल बाकिर आम आदमी के एह बात में बहुत कुछ आपत्तिजनक लागल. कहे वाला आ जेकरा ला कहल गइल ओकरा त कुछ खराब ना लउकल बाकिर दोसरा लोग के बहुते...
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