Category: भाषा

बतकुच्चन – ४१

पिछला दिने खूब बतकही सुने के मिलल आ हम बतरस लेत रहनी. बाकिर बतकही का दौरान बाताबाती आ गलथेथीओ सुने के खूब मिलल. त सोचनी काहे ना आजु बाते पर बतकुच्चन कइल जाव. बतकुच्चन करे वाला जरूरी नइखे कि बतबनवो होखे. बतकुच्चन करे आ गलथेथी करे...

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बतकुच्चन – ४०

जेकरा खातिर चोरी कइनी उहे कहलसि चोर. पता ना सबले पहिले ई बाति के कहले रहुवे बाकिर आदिकवि वाल्मिकी का बारे में कहल जाला कि ऊ पहिले डकैत रहलन आ लूट मार क के परिवार चलावत रहले. बाद में जब पता चलल कि उनुकर परिवार उनुका पाप के...

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बतकुच्चन – ३९

कहल जाला कि तुलसीदास लिख गइल बानी कि “कूदे फाने तूड़े तान, वाके दुनिया राखे मान”. तुलसीदास का जमाना में लोकतंत्र त रहे ना बाकिर उनुका अन्दाजा रहे कि कलियुग में का होखे जा रहल बा आ आवे वाला दिन में दुनिया केकर बाति...

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बतकुच्चन – ३८

पिछला दिने एगो सम्मानित पाठक के टिप्पणी आइल रहे कि भोजपुरी में श के इस्तेमाल ना होला. उहाँ के भोजपुरी के बढ़िया जानकार हईं आ भोजपुरी पर लगातार शोध करे में लागल बानी. अब एह बात से त हमरो विरोध नइखे कि भोजपुरी में श भा ष के...

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आन्हर कुकुर बतासे भूंके.

(बतकुच्चन – ३७) आन्हर कुकुर बतासे भूंके. भोजपुरी के ई कहाउत पिछला दिने तब याद आ गइल जब देश के एगो बड़का मंत्री इन्टरनेट के सोशल मीडिया का खिलाफ आग उगिले लगलन. कहे लगलन कि ओहिजा जवने मन में आवत बा लोग लिख देत बा. देखा देत...

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अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

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