बतकुच्चन – ४१
पिछला दिने खूब बतकही सुने के मिलल आ हम बतरस लेत रहनी. बाकिर बतकही का दौरान बाताबाती आ गलथेथीओ सुने के खूब मिलल. त सोचनी काहे ना आजु बाते पर बतकुच्चन कइल जाव. बतकुच्चन करे वाला जरूरी नइखे कि बतबनवो होखे. बतकुच्चन करे आ गलथेथी करे...
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