Category: साहित्य

बतकुच्चन – ६

सोचत बानी कि लोग कहत होखी कि ई अनेरे अतना बतकुच्चन कइले रहेला. जरुरे अनेरिया आदमी होखी जेकरा लगे दोसर कवनो काम नइखे. बाकिर का बताई कि अनेरिया होखल नीमन, अनेरिया होखल ना. अब रउरा पूछब कि अनेरिया आ अनेरिया में का फरक होला ? उहे...

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शिवरात्रि के त्यौहार

– अभयकृष्ण त्रिपाठी आईल बाटे फिर से बाबा शिवरात्रि के त्यौहार, भोले बाबा सुनी लिह बिनती हमार, मत दीह केहु के भी कवनो उपहार, भोले बाबा, भोले बाबा, भोले बाबा हमार II पापियन के नाश के महिमा सुनाईले, भस्मासुर के लीला भी भूले...

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एगो नवगीत

– रामरक्षा मिश्र विमल फूटल भाग लोराइल अँखिया मन पितराइल. असरा के अङना में सपनन के आवाजाही दिन बदलल का दिल बदलल मन हो जाला घाही अलगवला पर मुहर लगल जियरा छितराइल. थथमत आवेला बसंत मन सहमे लागल बा शीशा के पँजरा जाए में सोचे...

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कुछ दोहा

-चंदन मिश्र डाढ़ी जर अब गाछ के, बाटे रहल बटोर। आखिर फल कइसे मिली, पत्ता पत्ता चोर॥ जर से ले के डाढ़ तक, केहू ना कमजोर। केहू अधिका ले गइल, केहू थोरका थोर॥ जब घरहिं के लोग कइल, आपन देस गुलाम। जिअते जी जे मर गइल, ओकरा से का काम॥ पानी...

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