श्रेणी: साहित्य

दास मलूका कह गए सबके दाता राम !

– विकास अजगर करे ना चाकरी पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए सबके दाता राम ! चलीं तनी एह जानल सुनल कहावत के व्याख्या कइल जाव. सोचल जाव कि आखिर अजगर चाकरी काहे ना करे, पंछी काम काहे ना कर सँ आ आखिर राम का लगे देबे खातिर अतना...

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फागुन के आसे

– रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई....

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अधकपारी – जानकार औरतन खातिर एगो भुक्तभोगी के सुझाव

अधकपारी झेले वाला के एहसे बड़ डर दोसर ना होला कि ओकरा पर फेर अधकपारी के दौरा पड़े वाला बा. काहे कि एकरा साथही आवेला मन हुलियाये, उबकी, घुमरी, आ रोशनी अउर आवाज से जुड़ल कष्ट. अगर रउरा अधकपारी से परेशान बानी त ई किताब रउरा काम के बा....

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लोकतांत्रिक पत्रकारिता के आईना हवे ‘कही अनकही’

– प्रो॰ जगदीश्‍वर चतुर्वेदी उत्तर-पूर्वी राज्यन अउर पश्चिम बंगाल में हिन्दी पत्रकारिता में लोकप्रिय अखबार ‘सन्मार्ग’ के महत्वपूर्ण भूमिका बा. ई एह क्षेत्र के सबले बड़ हिन्दी अखबार ह. एकर बड़हन पाठक समुदाय एकर...

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लोकतांत्रिक पत्रकारिता के आईना हवे 'कही अनकही'

– प्रो॰ जगदीश्‍वर चतुर्वेदी उत्तर-पूर्वी राज्यन अउर पश्चिम बंगाल में हिन्दी पत्रकारिता में लोकप्रिय अखबार ‘सन्मार्ग’ के महत्वपूर्ण भूमिका बा. ई एह क्षेत्र के सबले बड़ हिन्दी अखबार ह. एकर बड़हन पाठक समुदाय एकर...

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