ई का हो रहल बा ?
– अशोक मिश्र एक बेर एह सदी के महानायक अमिताभ बच्चन एगो फिल्म में गीत गवले रहले, ये क्या हो रहा है, भाई ये क्या हो रहा है? एकर जवाब मिलल रहे कि, कुछ नहीं…कुछ नहीं… बस प्यार हो रहा है. हम एह फिल्म के देखले नइखी...
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Read MorePosted by Editor | Apr 3, 2011 | पुस्तक चर्चा |
– अशोक मिश्र आजु समाज के हर क्षत्र में गिरावट आइल बा, आवत जा रहल बा. त भला पत्रकारिता एकरा से बाचल कइसे रह जाईत. पिछला दू दशक में राजनीति आ पत्रकारिता में बहुते तेजी से गिरावट आइल बा. पइसा, चमक दमक, रुतबा आ दलाली के पर्याय...
Read More– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” आजु जी बहुत उदास बा. ए उदासी के कारन हम खुदे बानी. हमरा ई लागत रहल ह की भारत में जवन भ्रस्टाचार व्याप्त बा, अंधकार व्याप्त बा, असांति व्याप्त बा, ओकर कारन खाली नेते अउर अधिकारी बाने. नेता,...
Read More– विकास अजगर करे ना चाकरी पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए सबके दाता राम ! चलीं तनी एह जानल सुनल कहावत के व्याख्या कइल जाव. सोचल जाव कि आखिर अजगर चाकरी काहे ना करे, पंछी काम काहे ना कर सँ आ आखिर राम का लगे देबे खातिर अतना...
Read More– रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई....
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